उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर 

बढ़नी: जहाँ ‘बोर्ड’ पर कानून, सड़क पर ‘जाम’ का राज! ​कानून सो रहा, शराबी पी रहे: बढ़नी प्रशासन की ‘कुंभकर्णी’ नींद कब टूटेगी?

बढ़नी में गुंडाराज: सड़कों पर सजी 'मधुशाला', प्रशासन बना मूकदर्शक नियमों की धज्जियां: बढ़नी में सरेआम शराबखोरी, पुलिस की 'सुस्ती' पर सवाल ठेके के बाहर 'जाम' का तांडव: बढ़नी में महिला सुरक्षा दांव पर

अजीत मिश्रा (खोजी)

बढ़नी में ‘मधुशाला’ का खुला तांडव: प्रशासन की चुप्पी, खतरे में जन-सुरक्षा

  • बढ़नी: नेशनल हाईवे बना शराबियों का अड्डा, आम जनता त्रस्त
  • प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ा कानून: बढ़नी में बेलगाम शराबियों से लोग डरे
  • बढ़नी: क्या किसी हादसे के इंतजार में है पुलिस और आबकारी विभाग?

सिद्धार्थनगर: क्या नियमों का पालन कराना अब जिला प्रशासन और पुलिस के लिए विकल्प बन गया है? सिद्धार्थनगर जिले के ढेबरुआ थाना अंतर्गत नगर पंचायत बढ़नी में स्थिति कुछ ऐसी ही भयावह है। यहाँ नेशनल हाईवे-730 (पचपेड़वा-बलरामपुर मार्ग) एक ऐसी ‘मधुशाला’ में तब्दील हो चुका है, जहाँ कानून का इकबाल पूरी तरह दम तोड़ चुका है।WhatsApp Image 2026 07 02 at 6.56.23 PM 768x599 1

बोर्ड पर ‘वर्जित’, नीचे ‘महफिल’: नियमों का मजाक

​नगर पंचायत बढ़नी के बस स्टैंड चौराहे के पास, वार्ड नंबर 3 (लोहिया नगर) में एक सरकारी देसी शराब की दुकान स्थित है। दुकान के बाहर बोर्ड पर मोटे अक्षरों में लिखा है— “सार्वजनिक स्थान पर शराब पीना वर्जित है, उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।” लेकिन यह बोर्ड सिर्फ एक दिखावा है। इसी बोर्ड की छाया में, खुलेआम सड़क किनारे झुंड बनाकर शराबियों का जमावड़ा लगता है। ऐसा लगता है जैसे यहां की कानून व्यवस्था स्वयं उन शराबियों की पहरेदारी कर रही है।

अवैध ‘चखना’ सेंटर: अराजकता का अड्डा

​सूत्रों की मानें तो सरकारी ठेके के ठीक बगल में एक अवैध दुकान फल-फूल रही है, जो शराबियों के लिए ‘चखना’ और अन्य सुविधाओं का इंतजाम करती है। इस अवैध व्यापार ने सार्वजनिक सड़क को ‘अड्डे’ में बदल दिया है। सड़क किनारे बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी प्रशासन की कार्यशैली पर करारा तमाचा है।

महिलाओं का गुजरना हुआ दूभर

​यह मार्ग नेशनल हाईवे का हिस्सा होने के कारण अति व्यस्त है। स्कूली छात्राओं, महिलाओं और आम नागरिकों का यहाँ से निकलना किसी परीक्षा से कम नहीं है। नशे में धुत तत्वों द्वारा की जाने वाली अभद्र भाषा और हुड़दंग ने राहगीरों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जो पुलिस कभी पेट्रोलिंग कर अपराधियों में खौफ पैदा करती थी, आज वह सब कुछ जानते हुए भी ‘मूकदर्शक’ बनी हुई है।

प्रशासन की ‘कुंभकर्णी’ नींद पर सवाल

​आखिर पुलिस और आबकारी विभाग को किस बात का इंतजार है? क्या किसी बड़े हादसे या किसी अप्रिय घटना के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी?

जनता की मांग है:

  • ​शराब की दुकान के आसपास चल रही अवैध चखना-दुकानों को तत्काल सील किया जाए।
  • ​सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वालों के खिलाफ पुलिस द्वारा विशेष चेकिंग और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो।

​बढ़नी की जनता अब यह देखना चाहती है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक अपनी आंखें मूंदकर नियमों की धज्जियां उड़ते देखते रहेंगे। प्रशासन की यह निष्क्रियता न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि नागरिकों के ‘सुरक्षित जीने के अधिकार’ का भी सीधा अपमान है।

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