बस्ती: पूर्व थानाध्यक्ष आत्महत्या मामला, हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग में महिला समेत तीन गिरफ्तार

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: वाल्टरगंज के पूर्व थानाध्यक्ष आत्महत्या मामले का पर्दाफाश, हनीट्रैप-ब्लैकमेलिंग में महिला समेत तीन गिरफ्तार
- हनीट्रैप का जाल: पूर्व थानाध्यक्ष की खुदकुशी के मामले में 3 गिरफ्तार, ब्लैकमेलिंग से वसूले थे लाखों
- बस्ती पुलिस का बड़ा खुलासा: हनीट्रैप सिंडिकेट का पर्दाफाश, लग्जरी गाड़ी और मोबाइल बरामद
- मुंबई से लेकर बस्ती तक फैला था हनीट्रैप का काला कारोबार, पूर्व थानाध्यक्ष सुसाइड केस में तीनों आरोपी सलाखों के पीछे
- ब्लैकमेलिंग से प्रताड़ित होकर थानाध्यक्ष ने की थी खुदकुशी, पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता महिला समेत तीन को दबोचा
बस्ती।। वाल्टरगंज के पूर्व थानाध्यक्ष स्वर्गीय सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के सनसनीखेज मामले में बस्ती कोतवाली पुलिस ने तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपी हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना के जरिए लोगों से अवैध धन उगाही का एक बड़ा सिंडिकेट चला रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से एक बोलेरो वाहन और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
घटना और मुकदमा दर्ज
पुलिस के अनुसार, पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह ने 29 अगस्त 2026 को बस्ती कलेक्ट्रेट परिसर स्थित अपने सरकारी आवास पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में उनके पुत्र संदीप सिंह की तहरीर पर 5 सितंबर को थाना कोतवाली बस्ती में मुकदमा अपराध संख्या 387/2026, धारा 108 व 3(5) बीएनएस के तहत प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और विजय प्रकाश के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को 6 सितंबर की सुबह करीब 7:55 बजे सदर अस्पताल के सामने से दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रियंका चौधरी (पत्नी महेन्द्र चौधरी, निवासी बावनपार, थाना पैकोलिया, हाल निवासी गंधार थाना वाल्टरगंज), रामनयन चौधरी (निवासी गंधार) और विजय प्रकाश (निवासी पिपरा काजी, थाना पैकोलिया) के रूप में हुई है।
हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का सिंडिकेट
पुलिस की पूछताछ और तकनीकी जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी प्रियंका चौधरी पूर्व में मुंबई के ब्यूटी पार्लर एवं स्पा सेंटरों में काम करती थी। इस दौरान वह रईस और प्रभावशाली लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनकी आपत्तिजनक वीडियो और ऑडियो तैयार करती थी और फिर हनीट्रैप के जरिए ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूलती थी। वीडियो कॉल और चैटिंग के माध्यम से रुपयों की मांग की जाती थी। इस अवैध धंधे में उसके पिता रामनयन चौधरी और सहयोगी विजय प्रकाश पूरी तरह से उसका सहयोग करते थे। पुलिस अब तक चार लोगों को हनीट्रैप में फंसाकर धन उगाही किए जाने का दावा कर चुकी है, जिसमें डॉ. उमेश से 4 लाख रुपये, अहमद रजा से 5 लाख रुपये और आर्यन दीक्षित उर्फ जितेन्द्र दीक्षित से करीब 15 लाख रुपये ऐंठे जाने की बात सामने आई है। इस सिंडिकेट से जुड़े दर्जनों अन्य लोगों के बारे में भी पुलिस गहनता से जांच कर रही है।
पूर्व थानाध्यक्ष से संपर्क और आत्महत्या की वजह
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के गहन विश्लेषण से यह तथ्य उजागर हुआ है कि मृतक पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह का संपर्क भी प्रियंका चौधरी और विजय प्रकाश से था। घटना के दिन के कॉलिंग पैटर्न की जांच में यह बात सामने आई कि विजय प्रकाश ने दोपहर 1:41 बजे सूर्य प्रकाश सिंह को अंतिम कॉल किया था। पुलिस का मानना है कि इसी कथित प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग से अत्यधिक मानसिक दबाव में आकर सूर्य प्रकाश सिंह ने यह खौफनाक कदम उठाया। जांच में यह भी पता चला है कि करीब दो साल पहले हनीट्रैप से वसूली गई रकम से ही प्रियंका चौधरी ने बोलेरो वाहन (UP51BN 5805) खरीदा था, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है।
न्यायिक कार्रवाई और पुलिस टीम
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य कड़ियों को जोड़कर विस्तृत विवेचना जारी है। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस सनसनीखेज खुलासे और गिरफ्तारी को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक बृजानन्द सिंह, उपनिरीक्षक अजय कुमार यादव, उपनिरीक्षक जयविन्द सिंह, सर्विलांस प्रभारी शेषनाथ यादव, हेड कांस्टेबल देवेश, तथा कांस्टेबल किशन सिंह, संतोष कुमार, स्कन्द यादव और राकेश यादव शामिल रहे।
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