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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का वर्तमान परिप्रेक्ष्य

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का वर्तमान परिप्रेक्ष्य : चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं उत्तर प्रदेश शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने अपने व्याख्यान में कहा कि सामर्थ्यवान युवा राष्ट्र निर्माण की रीढ़ होता है। शिक्षा समाज में न केवल युवाओं के अंदर सामर्थ्य का विकास करती है वरन उन्हें संस्कार संस्कारवान एवं चरित्रवान भी बनती है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति और व्यक्ति द्वारा समाज में उन्नति और विकास का मार्ग प्रशस्त होता है ।शिक्षा व्यक्ति के मस्तिष्क का परिमार्जन करती है और वास्तविक शिक्षा व्यक्ति के हृदय का भी परिमार्जन करती है ।हृदय परिमार्जन से ही शिक्षा ज्ञान में परिवर्तित हो जाती है। राष्ट्र निर्माण एकाएक नहीं होता अपितु उसके पीछे एक अनवरत परिषद और राष्ट्र के प्रति समर्पित शिक्षा व्यवस्था होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन्हीं उद्देश्यों को प्राप्त करने का माध्यम है। जब किसी देश का युवा शैक्षिक रूप से सामर्थ्यवान होता है तो बड़ी से बड़ी और कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए उसका समाधान का मार्ग ढूंढ लेता है। व्यापक शिक्षा का अर्थ स्पष्ट रूप से इस रूप में देखा जा सकता है ।इसलिए शिक्षा निरंतर चलने वाली अधिगम प्रक्रिया है। भारत की शिक्षा का आधार वसुदेव कुटुंबकम और सर्वे भवन्ति सुखिनः की अवधारणा से परिपूर्ण है ।इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से संपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन द्वारा सफल भारत की कल्पना जो सर्व समावेशी रूप से आगे बढ़े करती है ।
कुलपति प्रोफेसर हरि बहादुर श्रीवास्तव ने अवसर पर कहा कि शिक्षा में विद्यार्थियों के अंदर की क्षमता को पहचानने की शक्ति होनी चाहिए और युवा अनुकूल उन मौलिक क्षमताओं को कार्य स्वरूप में प्रेषित करने का समर्थ को राष्ट्रीय शिक्षा नीति में दोनों बातें स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती हैं। इस अवसर पर उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा की महत्ता और उपाध्यता सर्वाधिक है शिक्षा जगत में प्राप्त और निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सर्व संपन्न शिक्षण संस्थानों की आवश्यकता होती है सर्व संपन्न शिक्षण संस्थान के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त योग्य और कुशल शिक्षक और प्रशासक की हमेशा रही है प्राचीन भारत से वर्तमान भारत की शिक्षा यात्रा और उपलब्धि को जब हम रेखांकित करते हैं तो उसमें योग शिक्षकों और योग प्रशंसकों का महत्व अपने आप सर्वाधिक हो जाता है राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों शिक्षकों में सर्वांगीण विकास के अनेक माध्यम को समाहित किया गया है। व्याख्यान कार्यक्रम में प्रोफेसर सौरव प्रोफ़ेसर दीपक बाबू प्रोफेसर सुनील कुमार श्रीवास्तव सत्येंद्र दुबे प्रोफेसर नेता यादव डॉक्टर सुनीता त्रिपाठी डॉक्टर दीप्ति गिरी डॉ नीरज सिंह डॉक्टर हृदयकांत पांडे डॉक्टर रविकांत त्रिपाठी डॉक्टर सत्यम मिश्रा सहित शिक्षक एवं विभिन्न संख्याओं के विद्यार्थी उपस्थित रहे उक्त जानकारी सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉक्टर अभियान प्रताप सिंह ने दी है

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