चार साल में पुलिसकर्मी आउट, तो थानेदार के ‘स्थायी ड्राइवर’ क्यों नहीं?

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा हाल ही में जारी किए गए उस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है, जिसमें चार वर्ष से एक ही थाने में पदस्थ पुलिसकर्मियों के तबादले किए जाने की बात कही गई है। आदेश का उद्देश्य थानों में लंबे समय से जमे कर्मचारियों को हटाकर कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाना बताया जा रहा है। लेकिन इस आदेश के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर यह व्यवस्था केवल पुलिसकर्मियों तक ही सीमित क्यों है?प्रदेश के अधिकांश थानों में ऐसे ड्राइवर मौजूद हैं जो वर्षों से एक ही थाना प्रभारी की गाड़ी चला रहे हैं। कई जगह तो स्थिति यह है कि थाना प्रभारी बदल गए, लेकिन उनके ड्राइवर नहीं बदले। लंबे समय से एक ही थाने में पदस्थ इन ड्राइवरों का स्थानीय नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि वे थाने की गतिविधियों, व्यवस्थाओं और प्रभाव क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।पुलिस विभाग में चर्चा है कि यदि एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थ रहना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा रहा, तो फिर यही नियम थाना प्रभारियों के ड्राइवरों पर क्यों लागू नहीं हो रहा? क्या ड्राइवर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली का हिस्सा नहीं हैं? क्या उन पर डीजीपी के आदेश की परिधि लागू नहीं होती? या फिर उन्हें इस व्यवस्था से अलग रखने के पीछे कोई विशेष कारण है?जानकारों का कहना है कि किसी भी थाने में वर्षों तक एक ही व्यक्ति का बने रहना प्रभाव, संपर्क और व्यवस्था पर पकड़ को मजबूत करता है। ऐसे में यदि पुलिसकर्मियों के तबादलों के पीछे पारदर्शिता और निष्पक्षता का तर्क दिया जा रहा है, तो वही तर्क ड्राइवरों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए।अब सवाल यह है कि जब चार साल से जमे पुलिसकर्मियों को हटाने की तैयारी हो चुकी है, तब वर्षों से एक ही थाने में डटे थाना प्रभारियों के ड्राइवरों के तबादलों को लेकर पुलिस मुख्यालय क्या फैसला लेगा? क्या विभाग इस दिशा में भी कोई स्पष्ट नीति बनाएगा या फिर तबादले की यह मुहिम केवल चुनिंदा कर्मचारियों तक ही सीमित रह जाएगी?पुलिस महकमे और आम जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि डीजीपी के आदेश की असली भावना सभी पर समान रूप से लागू होगी या फिर कुछ चेहरे इस व्यवस्था से बाहर ही रहेंगे। क्योंकि सवाल केवल तबादलों का नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है।
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