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श्रावण मास शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि पर नागपंचमी पर्व मनाया जाता है।

17 Aug 2026, 12:54 PM • Vande Bharat Live TV News
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वंदेभारतलाइवटीव न्युज, सोमवार 17 अगस्त 2026—:

नागपंचमीं हिंदू धर्म का एक पवित्र प्रमुख पर्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार नागपंचमीं का यह पर्व प्रतिवर्ष श्रावण मास की शुक्ल पक्ष पंचमीं तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान आशुतोष भोलेनाथ और नागदेवता की पूजा की जाती है ,और उन्हें शुद्ध गाय के दूध से स्नान भी कराया जाता है। इस बार 2026 में नागपंचमीं का यह पर्व सोमवार 17 अगस्त को मनाया जायेगा। नागपंचमीं पर भगवान शिव के साथ साथ नागदेवता की भी पूजा की परंपरा रही है। ऐसी मान्यता है कि नागदेवता भगवान शिव को अतिप्रिय हैं,और इसी कारण भोलेनाथ सदैव नाग को अपने गले में धारण करतें हैं, नागपंचमीं पर भक्तजन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग के साथ साथ वहां स्थापित नागदेवता की पूजा आराधना करतें हैं। नागपंचमीं पर सबसे पहले नागदेवता की प्रतिमा को और शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करते है, इसके पश्चात शुद्ध गाय के दूध से अभिषेक कर, तिलक,अक्षत, पुष्प आदि अर्पित करतें हैं,इसके बाद भगवान शिव की और नागदेवता की आरती वंदना करतें हैं। नागपंचमीं के दिन कई स्थानों पर लोग जीवित सांपों को दूध पिलाने की कोशिश करतें हैं, परंतु सांपों को दूध पिलाने की यह परंपरा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है, सांप सामान्यतौर पर दूध नहीं पीतें ,उनहें जबरदस्ती दूध पिलाना उनके लिए नुकसानदायक भी हो सकता है, और इसलिए भी नागपंचमीं पर जीवित सांप को पकड़कर दूध पिलाने के बदले मंदिर में स्थापित नागदेवता की प्रतिमा का पूजन अर्चन कर या शिव मंदिर मे शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित किया जा सकता.हैव प्राचीन धार्मिक मान्यतानुसार नागपंचमीं पर नागदेवता की पूजा आराधना वंदना करने से व्यक्ति को भय से मुक्ति मिलती है, जीवन में आने वाले संकट दूर होतें हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव के साथ साथ नागदेवता की पूजा वंदना करने से जीवन में सुख शांति उन्नति के द्वार खुलतें हैं। नागपंचमीं का यह अवसर केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं है, बल्कि मानव और प्रक्रृति के बीच सह अस्तित्व का प्रतीक भी है। धर्म शास्त्रों में नागों को पाताल लोक स्वामी और भगवान शिव का आभूषण माना गया है। नागपंचमीं का यह पर्व हमें शिक्षा देता.है कि शक्ति का सम्मान करना चाहिए और कमजोर निर्बल पर सदैव दया करना ही मानव धर्म है। यदि हम संयम, श्रद्धा प्रेम से प्रकृती की पूजा वंदना करेंगे तो हमारे सभी दोषों का निवारण हो सकता है, और जीवन में सुख शांति सौभाग्य की प्राप्ति हो सकती है। इसबार 17 अगस्त को नागपंचमीं के दिन पावन श्रावण मास का तीसरा सोमवार भी शुभ संयोग लेकर आया है,जो कि शिव भक्तों के लिए सोमवार का यह दिन शिव आराधना के लिए खास हो जाता है। नागपंचमीं के पर्व को केवल एक रस्म के मनाने के बदले इस पर्व के धार्मिक भाव महत्व को भी समझना बहुत जरूरी है, नागदेवता की पूजा आराधना प्रक्रृति और जीव जगत के प्रति सम्मान से भी जुड़ी परंपरा रही है। नागपंचमी के दिन भूलकर भी जमीन नहीं खोदना चाहिए, क्योंकि सर्पों का निवास जमीन के अंदर बिलों में होता है,अत: जमीन इस दिन जमीन नहीं खोदना चाहिए,इससे जमीन के अंदर रहने वाले जीवों को नुकसान पहुंच सकता है। इस दिन खेत जोतना,मिट्टी खोदना, घर की नींव रखना उचित नहीं माना जाता , क्योंकि इससे भूमि के अंदर रहने वाले जीव जंतुओं को नुकसान/ चोट पहुंच सकता है। धार्मिक मान्यतानुसार के अनुसार इस दिन लोहे से संबंधित कार्यों को करने से भी बचना चाहिए, घरों में आज के दिन लोहे के बर्तनों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, इस दिन सुई चाकू जैसे धारदार चीजें उपयोग मे नहीं लाना चाहिए , सिलाई बुनाई, इस दिन अच्छा नहीं माना जाता है।.इस दिन जीवों पर दया करना उनकी सुरक्षा करना चाहिए। हिंदू धर्म के अनुसार श्रावण मास का यह महिना अत्यंत पवित्र माना जाता है, नागपंचमीं पर पूरी तरह से सादगी भरा रहना चाहिए, श्रावण मास के पूरे दिन मांस मदिरा तामसिक भोजन आदि से बचना चाहिए। नागपंचमीं के साथ साथ पूरे श्रावण मास मे शुद्ध सात्विक भोजन ही ग्रहण किया जाना चाहिए। ” नागपंचमीं का यह पावन पर्व लाए समृद्धि का संदेश, आप सभी के घरों में हो सुख सौभाग्य, स्नेह का वास, शिव और नागदेवता की अनुकंपा सदा बनीं रहे जीवन भर। । आप सभी को पवित्र श्रावण मास और नागपंचमीं की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं।। ”

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