वृद्धावस्था पेंशन में उम्र का खेल? दो प्रकरणों पर गंभीर सवाल

(तथ्यों की तह तक — वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज | जनहित की सशक्त पहचान — समृद्ध भारत समाचार पत्र)
✍️ रिपोर्ट: मांगीलाल पुत्र श्री पुनमाराम विश्नोई
संवाददाता — वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज / समृद्ध भारत समाचार पत्र पत्रकार, आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता दूरभाष नंबर 7424929297
बाड़मेर/सोनड़ी। सामाजिक सुरक्षा वृद्धावस्था पेंशन योजना से जुड़े दो प्रकरणों में पेंशन स्वीकृति के समय दर्ज उम्र को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार निर्धारित पात्रता आयु पूरी होने से पहले अधिक उम्र दर्शाकर पेंशन लाभ प्राप्त किए जाने की आशंका सामने आई है।
राजस्थान में वृद्धावस्था पेंशन के लिए पुरुष की आयु 58 वर्ष तथा महिला की आयु 55 वर्ष पूर्ण होना आवश्यक है। ऐसे में पेंशन स्वीकृति के समय दर्ज उम्र और वास्तविक जन्मतिथि के बीच अंतर है या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

पहला मामला पुरखाराम पुत्र भींयाराम का है। पेंशन स्वीकृति संख्या RJ-S-11857759 दिनांक 22 दिसंबर 2020 है। पेंशन रिकॉर्ड में उम्र 60 वर्ष तथा जन्मतिथि 01 जनवरी 1961 दर्ज है।
दूसरा मामला भलवंती पुत्री/पत्नी रामूराम का है। पेंशन स्वीकृति संख्या RJ-S-12092074 दिनांक 17 फरवरी 2021 है। पेंशन रिकॉर्ड में उम्र 56 वर्ष तथा जन्मतिथि 09 अप्रैल 1965 दर्ज है।
शिकायतकर्ता के अनुसार मुख्य सवाल यह है कि वर्ष 2020-21 में पेंशन आवेदन के समय दोनों लाभार्थियों की वास्तविक उम्र क्या थी और पात्रता निर्धारित करने के लिए रिकॉर्ड में दर्ज उम्र किस आधार पर प्रमाणित की गई थी?
संबंधित लाभार्थियों के आधार, जनआधार अथवा अन्य निजी दस्तावेज शिकायतकर्ता के पास उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए विभाग से मांग की गई है कि वह अपने मूल रिकॉर्ड से पेंशन आवेदन, जनआधार विवरण, आयु प्रमाण, सत्यापन रिपोर्ट, स्वीकृति प्रक्रिया तथा पेंशन भुगतान का पूरा रिकॉर्ड जांचे। यदि उम्र अथवा जन्मतिथि में कोई संशोधन हुआ है तो उसका संशोधन इतिहास और आधार भी सामने लाया जाए।
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि निर्धारित पात्रता आयु पूरी नहीं होने के बावजूद अधिक उम्र दर्शाकर पेंशन स्वीकृत कराई गई और सरकारी राशि प्राप्त की गई, तो संबंधित पेंशन को नियमानुसार बंद/निरस्त करते हुए सरकारी धनराशि की नियमानुसार ब्याज सहित वसूली की जाए। गलत जानकारी देने वाले व्यक्ति तथा किसी अधिकारी, कर्मचारी या सत्यापनकर्ता की मिलीभगत अथवा गंभीर लापरवाही सामने आने पर उसके विरुद्ध भी नियमसम्मत कार्रवाई की जाए।
यह खबर किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी धन और सामाजिक सुरक्षा योजना की पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग को सामने रखने के लिए है। अंतिम तथ्य संबंधित विभाग के मूल अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।
अब सवाल एक ही है—पेंशन स्वीकृति के समय पात्रता की उम्र वास्तव में पूरी थी या रिकॉर्ड में उम्र बढ़ाकर पात्रता हासिल की गई? इसका जवाब सरकारी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच से सामने आना चाहिए।
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