जिसे विभाग ने हटाया, उसी को समिति ने बना दिया जिम्मेदार!

बर्खास्तगी के बाद भी सहायक प्रबंधक की कुर्सी तक पहुंचा कर्मचारी, भटगांव समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल!
सारंगढ़ – बिलाईगढ़ (छत्तीसगढ़) :- जिस कर्मचारी पर विभागीय कार्रवाई हो चुकी हो, उसके पुराने प्रकरणों की स्थिति स्पष्ट न हुई हो और विभाग उसे पद से पृथक कर किसी जिम्मेदार कर्मचारी को प्रभार सौंपने का निर्देश दे चुका हो—उसी कर्मचारी को यदि बाद में सहायक प्रबंधक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर समिति में नियमों की किताब चल रही है या सुविधा के हिसाब से व्यवस्था? प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति भटगांव में हीरालाल चन्द्रा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने का मामला अब समिति की पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। उपलब्ध विभागीय पत्रों और समिति के रिकॉर्ड से जुड़े तथ्यों के अनुसार, चन्द्रा के पूर्व कार्यकाल से करीब 2,000 नए बारदानों की कमी, चावल से संबंधित कथित अनियमितता, शिकायतें और कारण बताओ नोटिस जैसे मामले जुड़े रहे हैं।
सबसे गंभीर सवाल 24 दिसंबर 2025 के सहकारिता विभाग के पत्र को लेकर है। विभागीय पत्र में संबंधित कर्मचारी के पूर्व में बर्खास्त होने और न्यायालय से बहाली प्राप्त नहीं करने का उल्लेख करते हुए उन्हें तत्काल पद से पृथक कर किसी जिम्मेदार कर्मचारी को प्रभार सौंपने के निर्देश दिए गए थे। अब सवाल यह है कि विभाग ने जिस कर्मचारी को जिम्मेदारी से हटाने का निर्देश दिया था, उसी को समिति ने बाद में फड़ प्रभारी और फिर सहायक प्रबंधक की जिम्मेदारी कैसे सौंप दी? क्या विभागीय निर्देश के बाद कोई नया आदेश जारी हुआ? क्या सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई? और क्या पुराने प्रकरणों का अंतिम निराकरण हो चुका था?
समिति की व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल – मामला केवल एक कर्मचारी को जिम्मेदारी देने तक सीमित नहीं है। असली सवाल समिति की निर्णय प्रक्रिया पर है। यदि किसी कर्मचारी से जुड़े पुराने वित्तीय और प्रशासनिक प्रकरण लंबित हों, तो सामान्य तौर पर पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि उन मामलों का क्या हुआ। लेकिन यहां उल्टा दिखाई दे रहा है—पुराने सवालों के जवाब सामने नहीं आए और जिम्मेदारी नई मिल गई।
करीब 2,000 नए बारदानों की कमी का मामला भी कम गंभीर नहीं है। बताया जा रहा है कि धान खरीदी केंद्र भटगांव में पुराने कार्यकाल के दौरान यह कमी सामने आई थी और समिति के शिकायत पंजी में इसका उल्लेख था। यदि रिकॉर्ड में यह दर्ज है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कितने बारदानों की भरपाई हुई, कितनी राशि वसूल हुई और प्रकरण का अंतिम निपटारा कब और किसके आदेश से हुआ।
पुराने सवालों का हिसाब कौन देगा? – गधाभाटा में विक्रेता के पद पर रहते चावल की मात्रा में कथित हेराफेरी से जुड़े मामले और बाद में भरपाई कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। वहीं धान खरीदी के दौरान शिकायत और कारण बताओ नोटिस जारी होने की बात भी कही जा रही है। इन सभी मामलों में अंतिम जिम्मेदारी तय करने के लिए दस्तावेजों की जांच जरूरी है। लेकिन सवाल समिति से जरूर पूछा जा सकता है कि जब पुराने रिकॉर्ड ही सवालों के घेरे में हों, तब महत्वपूर्ण पद का प्रभार देने से पहले उनका सत्यापन क्यों नहीं किया गया?
विभागीय आदेश बनाम समिति की व्यवस्था – 24 दिसंबर 2025 का विभागीय पत्र अब पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है। यदि उसमें पद से पृथक करने का निर्देश था, तो उसके बाद की पदस्थापना और प्रभार आदेश की वैधता, सक्षम अधिकारी की अनुमति तथा नियमों के पालन की जांच जरूरी है।सहकारिता समिति किसानों के हित, धान खरीदी और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी संस्था है। ऐसे संस्थान में जिम्मेदार पदों पर नियुक्ति केवल व्यक्ति विशेष की पसंद का विषय नहीं हो सकती। रिकॉर्ड साफ होना, प्रक्रिया पारदर्शी होना और नियमों का पालन होना जरूरी है। अब जरूरत है कि समिति की फाइलों से लेकर विभागीय आदेशों तक पूरे मामले की जांच हो और यह सार्वजनिक किया जाए कि बर्खास्तगी के बाद बहाली के बिना संबंधित कर्मचारी को दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का आधार क्या था।
सहायक आयुक्त सहकारिता कामेश कुमार कश्यप ने कहा कि संबंधित कर्मचारी के पूर्व में बर्खास्त होने और न्यायालय से बहाली प्राप्त नहीं करने के संबंध में विभागीय पत्र जारी किया गया था। मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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