चावल तस्करी कांड: रिपोर्ट 5 दिन से अफसर की टेबल पर, फिर भी ‘विरेन’ पर कार्रवाई शून्य! आखिर किसका संरक्षण?

गडचिरौली से वंदे भारत LIVE TV NEWS के लिए ब्यूरो चीफ समीर वानखेड़े की विशेष रिपोर्ट*
महाराष्ट्र-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमावर्ती इलाके में कथित तांदूळ तस्करी के किंगपिन ‘विरेन’ के खिलाफ वृत्त श्रृंखला प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन ने राजस्व विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन हकीकत यह है कि रिपोर्ट हाथ में होने के बावजूद कार्रवाई आज भी ठंडे बस्ते में पड़ी है। इससे एक बार फिर जिला आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
*जांच पूरी, रिपोर्ट भेजी, फिर भी चुप्पी क्यों?*
इस मामले में सिरोंचा के तहसीलदार अजय सकुंदरवार ने स्पष्ट कहा है कि उन्होंने जांच पूरी कर ली है। संबंधित मामले के कई दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं और पूरी रिपोर्ट 5 दिन पहले ही जिला आपूर्ति अधिकारी को भेज दी गई है।
जब इस बारे में प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी मनोज डहारे से पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा, "रिपोर्ट देखकर जल्द ही आगे की कार्रवाई करेंगे।" अब सवाल यह है कि जब जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट भी हाथ में है, तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों? किसके इशारे पर फाइल दबाई जा रही है?
*दिन में 1-2 ट्रक, रात में खेला!*
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वृत्त श्रृंखला के बाद भी तस्करी नहीं रुकी है। सूत्रों के मुताबिक दिन में दिखावे के लिए एक-दो ट्रक भेजे जाते हैं, जबकि असली खेल रात के अंधेरे में होता है। ट्रकों की बड़ी खेप रात में सीमा पार कराई जाती है। प्रशासन को चाहिए कि वह ट्रांसपोर्ट रूट, गाड़ियों के कागजात, गोदाम और पूरे लेन-देन की स्वतंत्र जांच करे।
*बाजार समिति की भूमिका भी संदेह के घेरे में*
इस पूरे रैकेट में कृषि उत्पन्न बाजार समिति की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि बाजार समिति के कुछ लोग विरेन के कारोबार में मदद कर रहे हैं। समिति के तांदूळ के आवक-जावक रजिस्टर की जांच हुई भी है या नहीं, यह बड़ा सवाल है। चर्चा तो यह भी है कि बाजार समिति का एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ‘अजय’ आज भी विरेन के लिए काम कर रहा है। ऐसे में लग रहा है जैसे पूरी व्यवस्था ही विरेन की सेवा में लगी हो।
*तेलंगाना भागने की थी तैयारी, फिर लौटा*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, खबरें छपने के बाद विरेन ने तेलंगाना भागने की पूरी तैयारी कर ली थी। उसने अपने अहम दस्तावेज, लैपटॉप और पैसों के लेन-देन से जुड़े कागजात भी समेट लिए थे। लेकिन स्थानीय स्तर के एक अधिकारी का संरक्षण मिलने के बाद उसने अपना प्लान बदल दिया और फिर से तस्करी शुरू कर दी।
अगर प्रशासन ईमानदारी से उसके दस्तावेज, डिजिटल डाटा और ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड की जांच करे, तो इस पूरे तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।
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