विश्व हृदय दिवस विशेष: ‘Don’t Miss a Beat’—दिल की हर धड़कन है अनमोल

बदलती जीवनशैली के बीच हृदय की सेहत को लेकर डॉ. एफ.आर. निराला की खास अपील—लक्षणों को नजरअंदाज न करें, समय पर जांच और उपचार से बच सकती है जान
जिला संवाददाता गोपी अजय
सारंगढ़-बिलाईगढ़ ( छत्तीसगढ़ ) दिल शरीर का वह अंग है, जिसकी हर धड़कन जिंदगी की कहानी लिखती है। जब तक दिल धड़कता है, जीवन चलता है। लेकिन आज की बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, खान-पान की गलत आदतें और तंबाकू-गुटखे का बढ़ता सेवन हृदय को लगातार कमजोर कर रहा है। सबसे चिंता की बात यह है कि हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गया है। कम उम्र में भी हार्ट अटैक और हृदय संबंधी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। विश्व हृदय दिवस 29 सितंबर हमें इसी खतरे के प्रति जागरूक करने का अवसर देता है। इस वर्ष का संदेश “Don't Miss a Beat” है—अर्थात दिल की किसी भी धड़कन, संकेत या चेतावनी को नजरअंदाज न करें।
हृदय स्वास्थ्य को लेकर डॉ. एफ.आर. निराला (MBBS), 40 वर्षों के चिकित्सा अनुभव वाले चिकित्सक, लोगों को विशेष रूप से जागरूक करते हुए कहते हैं कि हृदय की बीमारी से बचाव केवल अस्पताल या दवा से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली में सुधार से शुरू होता है। उनका कहना है कि लोग अक्सर बीमारी के शुरुआती संकेतों को सामान्य थकान, गैस या कमजोरी समझकर टाल देते हैं और यही लापरवाही कई बार गंभीर स्थिति पैदा कर देती है।
आज ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की जीवनशैली भी तेजी से बदल रही है। खेती-किसानी में मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल से शारीरिक श्रम कम हुआ है, वहीं मोबाइल और टीवी के सामने लंबे समय तक बैठना, देर रात तक जागना और व्यायाम की कमी आम होती जा रही है। दूसरी ओर बीड़ी-सिगरेट, गुटखा, गुड़ाखू और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। खान-पान भी इस बदलाव का बड़ा हिस्सा है। अधिक नमक, तेल, तला-भुना भोजन, अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और अनियमित भोजन की आदतें मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती हैं। ये सभी हृदय रोग के महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।
डॉ. निराला के अनुसार, हृदय को स्वस्थ रखने के लिए किसी कठिन फार्मूले की जरूरत नहीं है। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण और तंबाकू से पूरी दूरी—ये साधारण आदतें लंबे समय तक दिल को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना और सक्रिय रहना भी जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात है हार्ट अटैक के चेतावनी संकेतों को पहचानना। छाती के बीच में दबाव, भारीपन या दर्द, दर्द का हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ तक जाना, अचानक सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर, बेचैनी या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षणों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। महिलाओं में लक्षण कभी-कभी अलग रूप में भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे असामान्य थकान, मतली या सांस लेने में परेशानी। ऐसी स्थिति में घरेलू उपचार या इंतजार करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। हृदय संबंधी आपात स्थिति में समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जितनी जल्दी मरीज को उचित चिकित्सा सुविधा मिले, उतना बेहतर उपचार संभव हो सकता है।
डॉ. एफ.आर. निराला लोगों से अपील करते हुए कहते हैं कि हृदय की बीमारी का इंतजार लक्षण गंभीर होने तक नहीं करना चाहिए। अपने स्वास्थ्य जोखिमों को समझना, आवश्यकतानुसार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना तथा चिकित्सकीय सलाह लेना जागरूक नागरिक की जिम्मेदारी है। विश्व हृदय दिवस का संदेश भी यही है कि अपने दिल की आवाज सुनिए। तंबाकू और गुटखे को जीवन से दूर करें, भोजन में संतुलन लाएं, शरीर को सक्रिय रखें, तनाव को नियंत्रित करें और हृदय से जुड़े किसी भी असामान्य संकेत को नजरअंदाज न करें। क्योंकि जिंदगी की सबसे खूबसूरत आवाज किसी संगीत की नहीं, बल्कि हमारे दिल की धड़कन है।
इस विश्व हृदय दिवस पर संकल्प लें—‘Don't Miss a Beat’… दिल की हर धड़कन को महत्व दें, समय पर जांच कराएं और अपने साथ-साथ अपने परिवार को भी हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाएं।
विशेष लेख :-
डॉ. एफ.आर. निराला (MBBS)
40 वर्ष का चिकित्सा अनुभव
निराला हॉस्पिटल, मेन रोड, पलारी, जिला बलौदाबाजार
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।






