CSTPS चंद्रपुर कॉपर चोरी कांड: गोंगले की गिरफ्तारी के बाद उठे कई संगीन सवाल, क्या मुख्य अभियंता करेंगे विभागीय जांच?

समीर वानखेडे ब्युरो चीफ वंदे भारत लाइव्ह टीव्ही न्यूज नेटवर्क:
चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केंद्र (CSTPS) में हुए बहुचर्चित कॉपर केबल चोरी कांड ने बिजली केंद्र प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी शिलरतन गोंगले की गिरफ्तारी के बाद यह मामला महज़ एक साधारण चोरी न रहकर एक बड़े संगठित सिंडिकेट और अंदरूनी सांठगांठ की ओर इशारा कर रहा है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब कई ऐसे अनुत्तरित सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब जनता और पुलिस जांच दोनों तलाश रही है। करोड़ों के ‘डल्ले’ में रहीम और किशोर की भूमिका?
सूत्रों के अनुसार, CSTPS परिसर से भारी मात्रा में कॉपर केबल गायब करने के खेल में रहीम और किशोर जैसे मुख्य किरदारों की संदिग्ध संलिप्तता सामने आ रही है। बिजली केंद्र परिसर में कड़ी सुरक्षा और CCTV कैमरों की मौजूदगी के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में कॉपर बाहर कैसे भेजा जा रहा था, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
आशंका जताई जा रही है कि सुरक्षा अधिकारियों और अंदरूनी कर्मचारियों की सरपरस्ती में यह खेल लंबे समय से चल रहा था, जिससे बिजली केंद्र को करोड़ों रुपये का चूना लगा है। गोंगले की गिरफ्तारी के बाद खुले कई राज
सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शिलरतन गोंगले की गिरफ्तारी के बाद से ही पावर प्लांट के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
गोंगले की गिरफ्तारी ने साबित कर दिया है कि चोरी की जड़ें सुरक्षा तंत्र के भीतर तक फैली हुई थीं। हालांकि, गोंगले के शिकंजे में आने के बाद भी कई बड़े सवाल अब भी अधर में लटके हैं:
क्या इस संगठित गिरोह में कुछ और उच्च अधिकारी शामिल हैं?
इतने बड़े पैमाने पर केबल की हेराफेरी किसके इशारे पर हो रही थी? जब्त वाहन का RTO वेरीफिकेशन कब?
पुलिस कार्रवाई के दौरान कॉपर केबल ले जाते समय छह पहिया वाहन को जब्त किया गया था। वाहन पर संदिग्ध स्टीकर/नाम दर्ज होने की बात सामने आई है, लेकिन अब तक इसके असली मालिक और RTO वेरीफिकेशन की प्रक्रिया को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।
आखिर इस वाहन का RTO वेरीफिकेशन कब पूरा होगा?
वाहन का वास्तविक मालिक कौन है और उसका इस कॉपर चोरी सिंडिकेट से क्या संबंध है?
क्या CSTPS मुख्य अभियंता बैठाएंगे विभागीय जांच? पुलिसिया जांच के साथ-साथ अब सबसे बड़ा सवाल CSTPS के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) पर उठ रहा है।
पावर प्लांट की संपत्ति की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक और आंतरिक तंत्र के लिप्त पाए जाने के बाद भी क्या मुख्य अभियंता स्तर पर निष्पक्ष विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश दिए जाएंगे? स्थानीय नागरिकों और ट्रेड यूनियनों की मांग है कि मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ एक उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच भी जरूरी है, ताकि इस पूरे रैकेट के आकाओं को बेनकाब किया जा सके।
> आगे क्या? > दुर्गापुर पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि RTO रिपोर्ट में वाहन मालिक का क्या खुलासा होता है और CSTPS प्रशासन इस पर क्या सख्त कदम उठाता है।
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