सूचना विभाग में गांधीजी एवं शास्त्रीजी की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई

सूचना विभाग में गांधीजी एवं शास्त्रीजी की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई
लखनऊ 02 अक्टूबर 2026
सूचना निदेशक श्री विशाल सिंह के मार्ग दर्शन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी एवं पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती आज सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ में हर्षोल्लास, श्रद्धा एवं गरिमापूर्ण वातावरण में मनाई गई। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग मुख्यालय के सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ अपर निदेशक श्री अरविन्द कुमार मिश्र द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
इसके पश्चात उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी दोनों महान विभूतियों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपिता के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तैने कहिए’ का सस्वर पाठ भी किया गया।
अपने संबोधन में अपर निदेशक श्री अरविन्द कुमार मिश्र ने दोनों महापुरुषों के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी जी का जीवन सत्य, अहिंसा, त्याग और सादगी का प्रतीक है।
उन्होंने सत्याग्रह के माध्यम से न केवल भारत को ब्रिटिश हुकूमत से स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि पूरी दुनिया को शांतिपूर्ण संघर्ष का मार्ग दिखाया। उनका चरखा, उनकी लाठी और उनके विचार आज भी भारत की आत्मा में जीवित हैं।
बापू ने हमें सिखाया कि साधन की पवित्रता साध्य से भी अधिक महत्वपूर्ण है। स्वच्छता को लेकर उनका आग्रह आज स्वच्छ भारत मिशन के रूप में साकार हो रहा है।
वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए श्री मिश्र ने कहा कि शास्त्री जी ने अत्यंत साधारण परिवार से आकर अपनी असाधारण प्रतिभा, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से देश का नेतृत्व किया। उनके द्वारा दिया गया अमर नारा ‘जय जवान, जय किसान’ आज भी देश की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा का मूल मंत्र है।
उन्होंने देश के जवानों का मनोबल बढ़ाया और किसानों को अन्नदाता के रूप में सम्मान दिलाया। उनकी सादगी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्री जी एक ऐसी मिसाल हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए भी कभी अपने पद का दुरुपयोग नहीं किया।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि ऊँचे पद पर रहकर भी कैसे विनम्र और जमीन से जुड़े रहा जाता है। श्री मिश्र ने कहा कि यह संयोग ही है कि 2 अक्टूबर को दो ऐसी महान विभूतियों का जन्म हुआ जिन्होंने भारत के इतिहास को नई दिशा दी।
एक ने स्वतंत्रता दिलाई तो दूसरे ने स्वतंत्र भारत को सशक्त और स्वावलंबी बनाने की नींव रखी। दोनों ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि सत्ता सेवा का माध्यम है, भोग का नहीं।उन्होंने सूचना विभाग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे गांधी जी के सत्य और अहिंसा तथा शास्त्री जी की सादगी और कर्तव्यनिष्ठा को अपनी कार्यशैली में अपनाएं।
सूचना विभाग सरकार और जनता के बीच सेतु का कार्य करता है, इसलिए हमारा दायित्व है कि हम पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि हम सभी को स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रप्रथम की भावना को अपने दैनिक जीवन में उतारना चाहिए, यही इन महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने तथा देश की एकता-अखंडता को बनाए रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर वरि0 वित्त एवं लेखाधिकारी संजय कुमार सिंह, उपनिदेशक अनुराग प्रसाद, आत्रेय मिश्रा, सहायक निदेशक सतीश चन्द्र भारती, चन्द्र मोहन, डाॅ0 जितेन्द्र प्रताप सिंह, सी0एल0 सिंह, प्रभात श्रीवास्तव,अमित कुमार यादव, निर्माता फिल्म अभय कुमार श्रीवास्तव सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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