अनुशासन के नाम पर अधीक्षक ने नशे में 82 आदिवासी छात्रों को किया आधा गंजा

वंदे भारत लाईव टीवी न्यूज के लिए ब्यूरो चीफ समीर वानखेड़े की रिपोर्ट :
चंद्रपुर जिले के चिमूर तहसील के जांभूळघाट की सरकारी माध्यमिक आदिवासी आश्रमशाला में अनुशासन के नाम पर छात्रों के साथ अमानवीय बर्ताव का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां अधीक्षक के इशारे पर नाई ने 82 छात्रों के आधे सिर के बाल ट्रिमर से काट दिए, जिससे वे अजीब हालत में घूमने को मजबूर हैं। इस घटना से आदिवासी पालकों में भारी गुस्सा है।
क्या है पूरा मामला?
चिमूर आदिवासी प्रकल्प के अंतर्गत आने वाली इस आवासीय आश्रमशाला में करीब 550 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। छात्रों के बाल काटने के लिए आदिवासी विभाग की तरफ से नाई नियुक्त किया गया है, जिसके लिए शनिवार और रविवार दो दिन तय हैं।
शनिवार दोपहर करीब 4 बजे आश्रमशाला परिसर में बाल काटने का काम चल रहा था। आरोप है कि कुछ छात्र बाल न कटवाकर परिसर में खेल रहे थे। इससे नाराज होकर अधीक्षक ने गुस्से में आकर नाई को एक छात्र का आधा गंजा करने का निर्देश दे दिया। देखते ही देखते 82 छात्रों के बाल ट्रिमर से आधे-अधूरे काट दिए गए।
'अनुशासन' या गुस्से का कहर?
सवाल उठ रहा है कि क्या किसी छात्र को अपमानित करके अनुशासन सिखाया जा सकता है? अगर छात्र ने अनुशासन तोड़ा भी था तो उसे समझाकर या नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती थी, लेकिन इस तरह आधा गंजा करके सजा देना कहां तक जायज है? इससे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ा होगा, इसकी किसी ने परवाह नहीं की।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि घटना के समय संबंधित अधीक्षक शराब के नशे में था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन परिसर में इसकी जोरदार चर्चा है।
मुख्याध्यापक ने दी सफाई, सिर्फ नोटिस देकर खानापूर्ति?
मामला सामने आने के बाद स्कूल के मुख्याध्यापक प्रशांत गिरी ने कहा, "मैं एक घंटे के लिए जरूरी काम से चिमूर गया था। वापस आने पर छात्रों ने मुझे इस घटना की जानकारी दी। संबंधित अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।"
लेकिन पालकों का कहना है कि सिर्फ नोटिस देकर इस गंभीर मामले को दबाया नहीं जा सकता। आधा गंजा करने का फैसला किस अधिकार से लिया गया? इसकी गहन जांच होनी चाहिए।
पालकों ने मांग की है कि संबंधित अधीक्षक के साथ-साथ मुख्याध्यापक पर भी कार्रवाई की जाए, क्योंकि आवासीय स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी उनकी भी है।
अब सबकी नजर चिमूर आदिवासी प्रकल्प और आदिवासी विभाग पर है कि वह इस शर्मनाक हरकत पर क्या कार्रवाई करता है।
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