*नशे से दूर और मानसिक रूप से मजबूत युवा ही बनाएंगे विकसित भारत*

*डॉ. पंकज गाड़िया ने नशामुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को बताया समय की आवश्यकता*
जोधपुर, 5 अक्टूबर। युवाओं को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से दूर रखने के साथ-साथ उन्हें मानसिक एवं भावनात्मक रूप से सशक्त बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलकर जनजागरूकता की दिशा में कार्य करना होगा। नशामुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान एवं जीवन संजीवनी चिकित्सा सेवा संस्थान, जोधपुर के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. वाई. के. दवे ने संस्थान के प्रतिनिधिमंडल के साथ जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी एवं वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज गाड़िया से शिष्टाचार एवं प्रोटोकॉल भेंट की। भेंट के दौरान डॉ. वाई. के. दवे ने ‘नशामुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ तथा ‘मन दर्पण–2’ मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के तहत विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभियान के माध्यम से किशोरों एवं युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के साथ-साथ परीक्षा तनाव, अवसाद, मानसिक दबाव, भावनात्मक उतार-चढ़ाव तथा सकारात्मक जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए व्याख्यान, संवाद एवं परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। डॉ. पंकज गाड़िया ने संस्थान द्वारा किए जा रहे जनहितकारी प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं को नशे से बचाने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए ऐसे जनजागरूकता अभियान वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को समय रहते सही मार्गदर्शन, परामर्श एवं आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए तो उन्हें नशे एवं मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से बाहर निकालने में काफी मदद मिल सकती है।
उन्होंने सुझाव दिया कि नशे से प्रभावित व्यक्तियों को राजकीय नशामुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ा जाए तथा आवश्यकता के अनुसार रियायती एवं निःशुल्क नशामुक्ति शिविरों का आयोजन किया जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि आवश्यकता होने पर जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की ओर से उपलब्ध सरकारी सुविधाओं एवं योजनाओं के माध्यम से हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। डॉ. वाई. के. दवे ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल नशामुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे युवाओं का निर्माण करना है जो मानसिक रूप से स्वस्थ, आत्मविश्वासी, जागरूक और समाज के प्रति जिम्मेदार हों। उन्होंने कहा कि स्वस्थ सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाला युवा ही अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में प्रभावी योगदान दे सकता है।
अभियान को गति देने में वरिष्ठ पुनर्वास एवं काउंसलिंग मनोवैज्ञानिक डॉ. सुशील रोहिवाल, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर (शैक्षणिक संस्थाएं) पंकज दवे बीड़ासनी तथा पुनर्वास परिषद् भारत (आरसीआई) से पंजीकृत मनोवैज्ञानिक काउंसलर्स एवं चिकित्सकों की टीम सक्रिय रूप से सहयोग कर रही है। डॉ. दवे ने बताया कि आने वाले समय में विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं एवं अन्य संगठनों के सहयोग से अभियान को और व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवाओं एवं अभिभावकों तक नशामुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य का संदेश पहुंचाया जा सके। इस अवसर पर डॉ. वाई. के. दवे, डॉ. सुशील रोहिवाल एवं पंकज दवे बीड़ासनी उपस्थित रहे।
*अभियान का संदेश* —
“घर-घर अलख जगाना है, नशे को दूर भगाना है।”
“स्वस्थ युवा — विकसित भारत।”
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