इंदौर में फर्जी D.Ed-B.Ed डिग्री से नौकरी का मामला: 51 शिक्षकों पर FIR की तैयारी, 100 करोड़ से अधिक की रिकवरी का अनुमान

🔴 तेजकुमार जारवाल
जिला रिपोर्टर | इंदौर
वंदे भारत LIVE TV NEWS
विशेष संवाददाता | इंदौर
इंदौर। शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला सामने आने के बाद इंदौर जिले के सांवेर विकासखंड में हड़कंप मचा हुआ है। जांच में फर्जी D.Ed और B.Ed डिग्री एवं अंकसूचियों के आधार पर नौकरी पाने वाले 51 शिक्षकों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। अब संबंधित शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
जांच के मुताबिक, इनमें से कई शिक्षक करीब दो दशक से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं और कुछ को इस दौरान पदोन्नति भी मिली है। शिक्षा विभाग अब इन शिक्षकों द्वारा सेवा अवधि में प्राप्त वेतन और अन्य लाभों का आकलन कर रहा है। विभागीय गणना के आधार पर संभावित वसूली की राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
2006-07 की संविदा शिक्षक भर्ती से जुड़ा मामला
मामला वर्ष 2006-07 में हुई संविदा शाला शिक्षक भर्ती से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतों के बाद एसटीएफ भोपाल और शिक्षा विभाग द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की शैक्षणिक डिग्रियों और अंकसूचियों में कथित गड़बड़ियां सामने आईं।
जांच में कुछ मामलों में एक ही रोल नंबर से अलग-अलग परीक्षार्थियों की अंकसूची मिलने की बात भी सामने आई है। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठे और विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
50 हजार से 1 लाख रुपये तक वेतन लेने का दावा
जांच के दायरे में आए शिक्षक वर्तमान में प्राथमिक और माध्यमिक सरकारी स्कूलों में पदस्थ बताए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें पद और सेवा अवधि के आधार पर हर महीने करीब 50 हजार से 1 लाख रुपये तक वेतन मिल रहा था।
बताया जा रहा है कि सितंबर 2024 में एसटीएफ की जांच के बाद संबंधित संकुल प्राचार्यों को आरोपित शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, कार्रवाई में देरी के चलते मामला लंबे समय तक लंबित रहा और संबंधित शिक्षक सेवा में बने रहे।
फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले गिरोह की आशंका
जांच में एक संगठित नेटवर्क की भूमिका की आशंका भी जताई गई है। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए अभ्यर्थियों के लिए फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज और अंकसूचियां तैयार कराई जाती थीं। कुछ मामलों में इसके लिए प्रति अभ्यर्थी लाखों रुपये लिए जाने की बात सामने आई है।
इसके अलावा दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान विभागीय स्तर पर भी लापरवाही या संभावित मिलीभगत की जांच किए जाने की आवश्यकता सामने आई है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका प्रमाणित होती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
100 करोड़ से अधिक की वसूली का अनुमान
सबसे बड़ा सवाल अब उन शिक्षकों को दिए गए वेतन और अन्य शासकीय लाभों की रिकवरी को लेकर है। शिक्षा विभाग द्वारा सेवा अवधि के दौरान प्राप्त वेतन का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। शुरुआती अनुमान के अनुसार कुल वसूली की राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। हालांकि, अंतिम राशि संबंधित विभाग की विस्तृत गणना और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
एक नजर में पूरा मामला
मामला: कथित फर्जी D.Ed/B.Ed डिग्री और अंकसूची के आधार पर सरकारी नौकरी
स्थान: सांवेर विकासखंड, इंदौर
जांच के दायरे में: 51 शिक्षक
भर्ती: वर्ष 2006-07 की संविदा शाला शिक्षक भर्ती
सेवा अवधि: करीब 20 वर्ष
वेतन: लगभग ₹50 हजार से ₹1 लाख प्रतिमाह तक
संभावित रिकवरी: ₹100 करोड़ से अधिक का अनुमान
प्रस्तावित कार्रवाई: FIR, दस्तावेजों की विस्तृत जांच और वेतन/अन्य लाभों की वसूली
अन्य जांच: फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क तथा संभावित विभागीय भूमिका की जांच
आगे क्या होगा?
अब शिक्षा विभाग द्वारा दस्तावेजों की अंतिम जांच, संबंधित शिक्षकों की जिम्मेदारी तय करने और FIR की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मिली नौकरी और वर्षों से लिए गए सरकारी वेतन की वैधता को लेकर भी विभागीय निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
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