पांच माह की नौकरी, कार का ख्वाब और अपराध की राह पर दो सिपाही, हिस्ट्रीशीटर साजिद पिस्टल ने बनाया अपना मोहरा, हर वारदात के बाद देता था आठ-आठ हजार रुपये

पांच माह की नौकरी, कार का ख्वाब और अपराध की राह पर दो सिपाही, हिस्ट्रीशीटर साजिद पिस्टल ने बनाया अपना मोहरा, हर वारदात के बाद देता था आठ-आठ हजार रुपये
मेरठ /उत्तर प्रदेश
खाकी पहनने के महज पांच महीने बाद ही दो सिपाही लालच के ऐसे जाल में फंस गए कि कानून के रखवाले ही अपराधियों के मददगार बन बैठे। भावनपुर थाने में मई में पहली तैनाती पाने वाले 2025 बैच के सिपाही आशीष और प्रश्नचित्त आनंद कार खरीदने के लिए रुपये जुटाने के लालच में हिस्ट्रीशीटर साजिद पिस्टल के संपर्क में आए। आरोप है कि साजिद हर वारदात के बाद दोनों को आठ-आठ हजार रुपये देता था। इससे पहले भी तीन घटनाओं में दोनों सिपाही इसी तरह रकम ले चुके थे।
साजिद के संपर्क में आने के बाद दोनों की अपराध की दुनिया में सक्रियता बढ़ती गई। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों सिपाहियों की साजिद और उसके साथियों से रोजाना कई-कई बार बातचीत होती थी। सोमवार को नकली नोटों के सौदे के दौरान भी दोनों आरोपितों की मदद में जुटे थे। इसी दौरान उनकी भूमिका सामने आने पर उन्हें भी मुकदमे में आरोपित बनाकर गिरफ्तार कर लिया गया।
कार खरीदने के लिए जोड़ रहे थे रकम
पुलिस के मुताबिक, दोनों सिपाही अपनी पहली तैनाती के बाद थाना परिसर में पुराने पुलिसकर्मियों और उनकी गाड़ियों को देखकर प्रभावित हुए। कार खरीदने की चाहत में वे जल्द रुपये जुटाना चाहते थे। इसी लालच ने उन्हें साजिद पिस्टल तक पहुंचाया। साजिद ने उन्हें हर घटना के बाद आठ-आठ हजार रुपये देने का लालच दिया और धीरे-धीरे दोनों को अपने गिरोह का हिस्सा बना लिया।
जेल से छूटने के बाद सिपाहियों को बनाया हथियार
साजिद पिस्टल को जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने जेल भेजा था। जेल से बाहर आने के बाद वह दोबारा अपराध की गतिविधियों में सक्रिय हुआ। आरोप है कि इसी दौरान उसकी दोनों सिपाहियों से नजदीकी बढ़ी। पहले वह वारदातों में निजी लोगों को पुलिस की वर्दी पहनाकर साथ रखता था, लेकिन इस बार उसने थाने के ही दो सिपाहियों को अपने गिरोह में शामिल कर लिया। दोनों सिपाही उसके साथ पार्टी भी कर चुके थे।
काल डिटेल ने खोली साठगांठ की परत
घटना के बाद पुलिस ने दोनों सिपाहियों के मोबाइल की काल डिटेल खंगाली तो साजिद और उसके साथियों से लगातार संपर्क की बात सामने आई। जांच में रोजाना कई बार बातचीत होने की जानकारी मिली। सोमवार की घटना में भी दोनों ने आरोपितों की मदद करने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने उनकी भूमिका को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की।
परिवार भी पहुंचा, करतूत पर जताई शर्मिंदगी
दोनों सिपाहियों की गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद उनके स्वजन भी हाथरस से मेरठ पहुंचे। परिवार के लोगों ने भी उनकी करतूत पर शर्मिंदगी जताई। वहीं, थाना प्रभारी प्रताप सिंह का कहना है कि पहली मीटिंग में ही सभी पुलिसकर्मियों को स्पष्ट कर दिया गया था कि पुलिसिंग के अलावा किसी अन्य गतिविधि में शामिल न हों। इसके बावजूद दोनों सिपाही साजिद के संपर्क में बने रहे।
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