*।। नारी सिर्फ परिवार का ही गौरव नहीं वो राष्ट्र का स्वाभिमान व समाज की प्रेरणा भी – लता पंड्या ।।*

*।। नारी सिर्फ परिवार का ही गौरव नहीं वो राष्ट्र का स्वाभिमान व समाज की प्रेरणा भी – लता पंड्या ।।*
*( दुर्गा वाहिनी मातृशक्ति का गांधी मैदान से निकला पथ संचलन , मार्ग में लोगो पुष्प वर्षा से किया स्वागत )*
जोधपुर । विश्व हिंदू परिषद की महिला इकाई दुर्गा वाहिनी मातृशक्ति शहर जिला का श्रद्धेय श्री अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के तहत सरदारपुरा के गांधी मैदान से विराट पथ संचलन निकाला गया।
दुर्गा वाहिनी संयोजिका ऐश्वर्या बागड़ी ने बताया कि संचलन से पूर्व हुए कार्यक्रम में मंच पर साध्वी ज्योति मां का सानिध्य , मुख्य अतिथि डॉ सुगंधा गोयल व मुख्य वक्ता दुर्गा वाहिनी की राजस्थान क्षेत्र संयोजिका लता पंड्या रही।
विशिष्ट अतिथि प्रांत संयोजिका विनीता तनवानी कुसुम थवानी व अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष संगीता मित्तल द्वारा की गई ।
वाहिनी की कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह पथ संचलन केवल सड़कों पर कदमताल करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति के जागरण, अनुशासन, संगठन, आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
हम उस महान भारत भूमि की संतान हैं, जहाँ नारी को सदैव शक्ति का स्वरूप माना गया है।
हमारे यहाँ कहा गया है—
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।"
अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है।
भारत की संस्कृति में नारी केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि समाज की प्रेरणा और राष्ट्र की शक्ति भी है।
जब ज्ञान की बात आती है तो हमें माँ सरस्वती का स्मरण होता है।
जब समृद्धि की बात आती है तो माँ लक्ष्मी का स्मरण होता है।
और जब अन्याय एवं अधर्म के विरुद्ध खड़े होने की बात आती है, तो हमें माँ दुर्गा का स्मरण होता है।
यही हमारी संस्कृति है, यही हमारी परंपरा है और यही नारी शक्ति का वास्तविक स्वरूप है।
भारत का इतिहास वीरांगनाओं के साहस और बलिदान से भरा हुआ है।
माता जीजाबाई ने छत्रपति शिवाजी महाराज को ऐसे संस्कार दिए, जिन्होंने स्वराज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
मुख्य अतिथि डॉ सुगंधा गोयल ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई ने अपने साहस से यह सिद्ध किया कि मातृभूमि की रक्षा में नारी किसी से पीछे नहीं है।
माँ पन्नाधाय ने अपने अद्वितीय त्याग से कर्तव्य और समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
और माता अहिल्याबाई होल्कर ने सेवा, न्याय, धर्म और सुशासन के माध्यम से समाज को नई दिशा दी।
ये वीरांगनाएँ हमें संदेश देती हैं कि नारी केवल शक्ति की उपासक नहीं, स्वयं शक्ति का स्वरूप है।
आज आवश्यकता है कि हमारी बेटियाँ इन महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लें और शिक्षा, संस्कार, सेवा, आत्मनिर्भरता तथा नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ें।
प्रांत संयोजिका विनीता तनवानी ने कहा कि दुर्गा वाहिनी का संदेश स्पष्ट है नारी शिक्षित हो, संस्कारित हो, संगठित हो, आत्मनिर्भर हो और अपनी सुरक्षा के प्रति सजग हो।
आज के समय में बेटियों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ आत्मरक्षा का प्रशिक्षण, डिजिटल सुरक्षा की जानकारी, कानून के प्रति जागरूकता और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी आवश्यक है।
क्योंकि सशक्त नारी ही सशक्त परिवार, सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती है।
आज इस पथ संचलन में एक जैसी वेशभूषा, अनुशासित कदमताल और चेहरों पर आत्मविश्वास हमें यही संदेश दे रहे हैं कि हमारी मातृशक्ति जागरूक है, संगठित है और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझती है।
आज हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने परिवारों में संस्कारों का वातावरण बनाएं, बेटियों को आगे बढ़ने के समान अवसर दें, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए कार्य करें तथा समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का संकल्प लें।
हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमारी संस्कृति का संरक्षण केवल परंपराओं को याद रखने से नहीं, बल्कि उनके श्रेष्ठ मूल्यों को अपने आचरण में उतारने से होगा।
सेवा, सद्भाव, करुणा, साहस, सत्य और कर्तव्यनिष्ठा—यही हमारी संस्कृति की वास्तविक पहचान हैं।
प्रांत सह संयोजिका प्रेक्षा रामावत ने बताया कि पथ संचलन घोष की ताल के साथ कदम ताल करते हुए सी रोड भेरू बाग जालोरी गेट गोल बिल्डिंग बी रोड होते हुए पुनः मैदान में संपन हुआ ।
इस अवसर पर विहिप के मानाराम विश्नोई राजेश पटेल भुवनेश खानालिया सुरेंद्र प्रजापत बाबूलाल प्रजापत प्रकाश कुमावत जिला अध्यक्ष सुरेश अयानी मंत्री तरुण सोतवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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