राजस्थान अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम 2023 को तत्काल प्रभाव से लागू करने की फिर उठी मांग

जोधपुर : इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU), जोधपुर ने अजमेर जिले के किशनगढ़ में अधिवक्ता बाबूलाल बागरिया के साथ ट्रैफिक डीएसपी अंजू यादव द्वारा थप्पड़ मारने एवं दुर्व्यवहार किए जाने की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। यूनियन ने इस घटना को अधिवक्ता समुदाय के सम्मान, गरिमा एवं सुरक्षा पर गंभीर हमला बताते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने तथा मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है।
AILU के जिला अध्यक्ष एडवोकेट पी.आर. मेघवाल एवं जिला सचिव एडवोकेट महिपाल सिंह ने कहा कि दिनांक 9 अक्टूबर 2026 को किशनगढ़ के मदनगंज थाना क्षेत्र में वाहन पार्किंग को लेकर हुए विवाद के दौरान ट्रैफिक डीएसपी अंजू यादव द्वारा अधिवक्ता बाबूलाल बागरिया को थप्पड़ मारने एवं उनके साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
मुख्यमंत्री के जिला प्रशासन के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया । पुलिस प्रशासन का दायित्व कानून का पालन करवाना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, लेकिन यदि कानून लागू करवाने वाले अधिकारी ही अपने पद एवं वर्दी का दुरुपयोग कर कानून के पेशे से जुड़े व्यक्ति के साथ मारपीट एवं अपमानजनक व्यवहार करते हैं, तो यह कानून के शासन और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग हैं। अधिवक्ता संविधान, कानून और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालयों में संघर्ष करते हैं।
किसी अधिवक्ता के साथ इस प्रकार का व्यवहार केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि संपूर्ण अधिवक्ता समुदाय की गरिमा एवं स्वतंत्रता पर हमला है। पुलिस की वर्दी किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर नहीं बनाती है और किसी भी विवाद की स्थिति में कानूनसम्मत प्रक्रिया अपनाना प्रत्येक पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी है।
AILU ने राजस्थान सरकार से मांग की है कि अधिवक्ता बाबूलाल बागरिया के साथ हुई घटना की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच करवाई जाए तथा जांच पूरी होने तक संबंधित डीएसपी अंजू यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। इसके साथ ही संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
एआईएलयू ने राजस्थान विधानसभा द्वारा पारित राजस्थान अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम – 2023 को तत्काल प्रभाव से पूर्ण रूप से लागू करने तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक नियम, अधिसूचनाएं एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही भविष्य में अधिवक्ताओं के साथ पुलिस अधिकारियों द्वारा दुर्व्यवहार, मारपीट एवं पद के दुरुपयोग की घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की है।
अधिवक्ताओं की सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। यदि कानून की रक्षा करने वाले अधिवक्ता ही सुरक्षित नहीं होंगे, तो आम नागरिकों के अधिकारों एवं न्याय व्यवस्था की स्वतंत्रता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
राज्य सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर दोषी अधिकारी की जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। AILU ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं के सम्मान, सुरक्षा एवं अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन संघर्षरत रहेगा तथा राजस्थान अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करवाने के लिए अपना आंदोलन जारी रखेगा।
इस दौरान राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर की पूर्व पुस्तकालय सचिव एडवोकेट कांता राजपुरोहित, एडवोकेट किशन मेघवाल, एडवोकेट बी. आर.
डेलू, एडवोकेट स्वरूप राम बामणिया, एडवोकेट श्रवण कुमार जोरम , एडवोकेट विशाल राज , एडवोकेट कृपाराम लीलावत , एडवोकेट अजय कुमार, एडवोकेट चंद्रशेखर, एडवोकेट रतनाराम जयपाल, एडवोकेट खुशवंत शर्मा, एडवोकेट आशा मीणा, एडवोकेट बिंदिया, एडवोकेट पूर्णिमा, नितेश भंडारी, गजेंद्र, रेखा राठौड़ समेत अनेक अधिवक्ता उपस्थित रहे ।
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