खोरी कला मे बंदरों का खूनी आतंक, महिला व बच्चों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

तावडू:खोरी कलां में बंदरों का खूनी आतंक, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार।
तावडू। खोरी कलां गांव में बंदरों का बढ़ता आतंक ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। बंदरों के हमलों से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण आजाद अली,लियाकत,हनी,पूनम,आशा, मिसकिना,अफसरी,जावेद,मुनतिजा,का कहना है कि गांव में बंदर लगातार लोगों पर हमला कर रहे हैं, जिसके चलते कई बच्चे घायल हो चुके हैं। हाल ही में एक महिला पर बंदरों के हमले की घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार, बंदरों के आतंक के कारण गांव में भय का माहौल बना हुआ है। महिलाएं और बुजुर्ग घर से बाहर निकलने में परेशानी महसूस कर रहे हैं, वहीं अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। बंदरों के हमलों की आशंका के चलते लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या अब केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बन चुकी है। ऐसे में प्रशासन की ओर से तत्काल प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
बंदरों के आतंक से परेशान गांव खोरी कलां के ग्रामीणों ने एसडीएम को लिखित शिकायत देकर मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है। 16 अक्टूबर 2026 को लिखे गए शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने गांव में बंदरों के बढ़ते हमलों और उससे पैदा हो रही परेशानियों का उल्लेख किया है।
शिकायत में प्रशासन से मांग की गई है कि संबंधित विभाग और वन्यजीव बचाव दल की टीम को गांव में भेजा जाए। बंदरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की व्यवस्था की जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके और भविष्य में किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सके।ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। उनका कहना है कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस मामले में देरी लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।
अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। गांववासियों को उम्मीद है कि अधिकारियों द्वारा जल्द कदम उठाकर बंदरों के आतंक से राहत दिलाई जाएगी।
अब देखना यह है कि ग्रामीणों की इस शिकायत पर प्रशासन कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और खोरी कलां के लोगों को बंदरों के आतंक से कब राहत मिलती है।
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