बलिया परिवार न्यायालय में पेश नहीं हुए पवन सिंह, ₹3,000 का जुर्माना; ज्योति सिंह बोलीं—आज भी उनके साथ रहना चाहती हूं

बलिया। भोजपुरी फिल्म अभिनेता और गायक पवन सिंह तथा उनकी पत्नी ज्योति सिंह के तलाक और भरण-पोषण से जुड़े मामले की सुनवाई बलिया परिवार न्यायालय में हुई। सुनवाई के दौरान ज्योति सिंह अदालत में उपस्थित रहीं, जबकि पवन सिंह गैरहाजिर रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने उनकी अनुपस्थिति पर 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
मामले की सुनवाई के दौरान पवन सिंह के वकील ने उनकी मां के अस्पताल में भर्ती होने से संबंधित मेडिकल दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए। साथ ही, मामले को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने के लिए आवेदन भी दिया गया। हालांकि, इस प्रक्रिया का आगे क्या परिणाम होगा, यह आगामी सुनवाई में स्पष्ट हो सकेगा।
चार साल से न्याय की उम्मीद में ज्योति सिंह
अदालत पहुंचीं ज्योति सिंह ने कहा कि इस मामले को चलते हुए करीब चार साल हो चुके हैं। उन्होंने न्यायालय पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें अब भी न्याय मिलने की उम्मीद है।
ज्योति सिंह के मुताबिक, वह आज भी पवन सिंह के साथ रहना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें यहां से न्याय नहीं मिलता है, तो वह सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगी।
ज्योति सिंह ने पवन सिंह की गैरहाजिरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार तारीख पड़ने के बावजूद उनके अदालत में उपस्थित नहीं होने से मामले के निस्तारण में देरी हो रही है। उनका कहना है कि चार साल बीत जाने के बाद भी वह न्याय की प्रतीक्षा कर रही हैं।
12 नवंबर को अगली सुनवाई
मामले में अगली सुनवाई की तारीख 12 नवंबर निर्धारित होने की जानकारी दी गई है। अब अगली तारीख पर पवन सिंह अदालत में उपस्थित होते हैं या नहीं और मध्यस्थता के आवेदन पर क्या प्रक्रिया आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।
क्या है पवन सिंह और ज्योति सिंह का मामला?
पवन सिंह और ज्योति सिंह की शादी 6 मार्च 2018 को हुई थी। ज्योति सिंह उनकी दूसरी पत्नी हैं। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच संबंधों में तनाव आया और वे अलग रहने लगे।
वर्ष 2022 में तलाक और भरण-पोषण को लेकर कानूनी कार्यवाही शुरू हुई। ज्योति सिंह ने पवन सिंह पर उत्पीड़न सहित गंभीर आरोप लगाए थे, जिन्हें पवन सिंह ने खारिज किया है। पवन सिंह तलाक चाहते हैं, जबकि ज्योति सिंह ने साथ रहने की इच्छा जताई है और भरण-पोषण को लेकर भी कानूनी लड़ाई जारी है।
यह मामला अभी न्यायालय में लंबित है। इसलिए दोनों पक्षों के बीच विवाद से जुड़े आरोपों और दावों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले के बाद ही निकाला जा सकेगा।
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