श्रद्धालुओं की भीड़ में तेंदुए का खौफ: माता के दर्शन को जा रहे 9 वर्षीय कार्तिक को परिवार के सामने उठा ले गया तेंदुआ, दो घंटे बाद ऐसे बचाई जान

समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
नवरात्र के पावन अवसर पर माता के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं के बीच एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बल्लारपुर से चंद्रपुर के बीच माता महाकाली के दर्शन के लिए पैदल जा रहे भक्तों के जत्थे पर एक तेंदुए ने हमला कर दिया।
तेंदुआ भीड़ के बीच से 9 साल के एक मासूम बच्चे को परिवार के सामने ही घसीटते हुए झाड़ियों में ले गया। गनीमत यह रही कि करीब दो घंटे बाद होश में आने पर बच्चे ने खुद अपनी सूझबूझ से अपनी मौजूदगी का अहसास कराया, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया।
कैसे घटी पूरी घटना? भीड़ के बीच हमला: बल्लारपुर के शांतिनगर निवासी परिवार और उनके पड़ोसियों समेत करीब 12 लोगों का जत्था 17 अक्टूबर की रात माता के दर्शन के लिए निकला था।
इसी समूह में हैदराबाद से अपनी बुआ के यहां आया 9 वर्षीय कार्तिक संजय जाधव भी शामिल था। 12 फीट ऊंची दीवार फांदकर आया तेंदुआ: विसापुर टोल नाके से पहले अचानक एक तेंदुआ करीब 12 फीट ऊंची दीवार फांदकर सड़क पर आ धमका और सीधे कार्तिक को अपना शिकार बनाते हुए झाड़ियों में खींच ले गया।
दो घंटे बाद दी मौजूदगी की खबर: घटना के बाद वन विभाग और स्थानीय लोग तुरंत बच्चे की तलाश में जुट गए। करीब दो घंटे बाद, जब झाड़ियों की तरफ से लगातार ताली बजाने की आवाज सुनाई दी, तो लोगों का ध्यान उधर गया।
पास जाकर देखने पर कार्तिक घायल अवस्था में पड़ा मिला। अस्पताल में इलाज जारी, हालत नाजुक
तेंदुए के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए कार्तिक को तुरंत पुलिस की गाड़ी से चंद्रपुर के जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि वन विभाग की टीम जंगल में बच्चे को तलाश रही थी, जबकि वह घटना स्थल से कुछ ही दूरी पर झाड़ियों में घायल पड़ा था।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल
नवरात्र के दौरान बल्लारपुर से चंद्रपुर तक हर साल हजारों श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं। इस मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए स्टॉल और भारी चहल-पहल रहती है।
ऐसे में, भारी जनसैलाब और रोशनी के बीच तेंदुए का इस तरह बेखौफ हमला करना प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े करता है:
क्या जंगल से सटे इन संवेदनशील मार्गों पर पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं? क्या वन विभाग ऐसे मार्गों पर नाइट पेट्रोलिंग और निगरानी बढ़ाएगा?
इस झकझोर देने वाली घटना ने जहां एक तरफ माता के भक्तों में दहशत पैदा कर दी है, वहीं छोटे कार्तिक की बहादुरी और जिंदादिली ने उसे जीवन की इस जंग में एक नई उम्मीद दी है।
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