शारदीय नवरात्र- नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें रूप देवी सिद्धिदात्री की पूजा होती है

शारदीय नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप देवी सिद्धिदात्री की पूजा आराधना की जाती है, इस दिन कन्या पूजन और हवन भी किया जाता है।.देवी सिद्धिदात्री की पूजा से मनुष्य को जीवन में सुख शांति, समृद्धी प्राप्त होती है। नवरात्रि महानवमी तिथि पर देवी सिद्धिदात्री के दिव्य स्वरूप की पूजा उपासना का विशेष महत्व माना जाता है।.धार्मिक रिति रिवाज के अनुसार देवी सिद्धिदात्री आठ सिद्धियां और नौ निधियां प्रदान करने वाली देवी मानी जाती है।
देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत दिव्य कल्याणकारी माना गया है। देवी मां चतुर्भुजी हैं।
देवी मां के दाहिने हाथ में चक्र,गदा और बाएं हाथ में शंख ,कमल पुष्प शोभायमान है। देवी सिद्धिदात्री मां सिंह.की सवारी करतीं हैं, और कमल के आसन पर भी विराजती दिखाई देतीं हैं।
देवी मां का यह रूप शक्ति, सिद्धियां, ज्ञान का प्रतीक हैं।.देवी सिद्धिदात्री को सरस्वती का स्वरूप भी माना जाता है। माना जाता है कि देवी सिद्धिदात्री की शक्ति से ही शिव जी का आधा शरीर देवी का हुआ था, जिससे भगवान शिव " अर्धनारीश्वर " भी कहलाएं ।
नवरात्रि के नौवें दिन नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने की भी परंपरा रही है। ऐसा माना जाता है कि छोटी कन्याओं को देवी रूप मानते हुए उनकी पूजा सेवा करने से देवी दुर्गा मां प्रसन्न होतीं हैं।
इस बार 2026 शारदीय नवरात्र में नवमी तीथि 19 अक्टूबर सोमवार को पड़ रही है। नवरात्र नवमी तिथि पर प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण, देवी सिद्धिदात्री का ध्यान करते हुए व्रत और पूजन करने का संकल्प लेना चाहिए।
पूजा को दौरान सबसे पहले कलश और कलश में विराजमान सभी देवी देवताओं का ध्यान नमन कर फिर पूजा करनी चाहिए।.देवी सिद्धिदात्री को रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, चुनरी अर्पित कर, धूप दीप प्रज्वलित करके श्रद्धापूर्वक मां की पूजा करनी चाहिए। देवी सिद्धिदात्री को पूरी,हलुआ, खीर, श्रीफल आदि का भोग प्रसाद अर्पित करना चाहिए।
पूजा के दौरान देवी के मंत्रों का जप भी करना चाहिए। पूजा होने के बाद नौ कन्याओं का पूजन कर ,परंपरा अनुसार कन्याओं को भोजन कराकर अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, उपहार भी भेंट में देना चाहिए व पूजा के अंत में देवी सिद्धिदात्री का विधिवत आरती वंदना करके ,देवी मां से पूजा आराधना के दौरान हुए त्रुटियों के क्षमा याचना करनी चाहिए, और अपने और अपने घर परिवार के लिए मां कल्याण की कामना करनी चाहिए।
देवी मां सिद्धिदात्री की पूजा आराधना से लौकिक, पारलौकिक, सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति होती है। देवी का बीजमंत्र = हीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
देवी का पूजन मंत्र = ऊँ ऐं हीं क्लीं सिद्धात्र्यै नम:। देवी का श्लोक = " या देवी सर्वभूतेषु सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।। शारदीय नवरात्रि के नौवें दिन महानवमी तिथी .नवरात्रि के अंतिम दिन देवी मां सिद्धिदात्री की पूजा आराधना की जाती है, और इस दिन हवन पूजन भी किया जाता है, हवन पूजन के साथ ही देवी मां के मंत्रों का जप भी किया जाना चाहिए, इस दिन एक सौ आठ मंत्रों का जप कर हवन करना उत्तम रहता है।
देवी मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों की बुराईयों और उनके जीवन को अंधकार को दूर करती है, जीवन में खुशहाली लेतीं हैं। नवरात्रि के नौवें दिन महानवमी पर नवरात्रि की नौ दिनों की संपूर्ण साधना ,उपासना, का समापन भी होता है, अत: इस दिन देवी मां को नौ प्रकार के भोग प्रसाद, फल, मिष्ठान, आदि अर्पित करना उत्तम होता है।
इस दिन देवी मां को कमल या लाल पुष्पों की माला अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथियों, देवी मां के इन सभी विधानों को केवल एक औपचारिकता के लिए ही नहीं, बल्कि पूर्ण, आस्था भक्ती श्रद्धा, निरंतरता के साथ किया जाना चाहिए।
देवी माता का पूजन ध्यान, शुद्ध चित , पूरे समर्पण के साथ, सच्चे ह्रदय, सच्चे भाव भक्ती के साथ किया जाना चाहिए।.बाहरी आडंबर की अपेक्षा आंतरिक मन से समर्पण और सच्ची निष्ठा, भक्ति.श्रद्धा से की गई पूजा उपासना ही देवी देवता की वास्तविक प्रसन्नता का कारण भी बनती है। साथियों , नवरात्रि पूजन को विधि पूर्वक संपन्न करने के लिए देवी मां की कृपा प्राप्त करने के लिए किसी योग्य, विद्वान, अनुभव पुरोहित या आचार्य का मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करना चाहिए, जिससे कि नवरात्र पूजन मे किसी प्रकार से कोई गलतियां न हो ,सही विधी विधान से पूजा संपन्न हो , और देवी की कृपा प्राप्त हो सके।
" आप सभी को दूर्गा महानवमी और विजयादशमी दशहरा पावन पर्व की हार्दिक बधाई, शुभकामनाऐं" ईश्वर की कृपा अनुग्रह से सभी सुखी रहें, सबको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सूख समृद्धि, वैभव मिले, यही कामना करतें हैं। जय माता दी।
जय श्रीराम। हर हर महादेव।
।. ।।धन्यवाद ।।
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