बिरसिंहपुर में विकास या सरकारी धन की कब्रगाह? लाखों की नालियां जमीन में दफन, बोर में मोटर गायब, पाइपलाइन नदारद! आखिर नगर परिषद के निर्माण कार्यों का हिसाब कौन देगा?*

*जनता टैक्स चुकाए और जिम्मेदार मिट्टी में दबा दें विकास! गैवीनाथ स्टेडियम से कृषि मंडी तक उठे सवाल, ठेकेदारों और इंजीनियरों की कार्यप्रणाली जांच के घेरे में!*
बिरसिंहपुर, सतना।
बिरसिंहपुर में विकास के नाम पर सरकारी धन खर्च होने की कहानी अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। कहीं लाखों रुपये की नालियां जमीन के नीचे दब गईं, कहीं बोर तो करा दिया गया लेकिन मोटर और पाइपलाइन का अता-पता नहीं, तो कहीं जनता वर्षों से नाली निर्माण की बाट जोह रही है। आखिर यह कैसा विकास है, जिसका लाभ जनता को नहीं, बल्कि सिर्फ कागजों और निर्माण के दावों को मिलता दिखाई दे रहा है?
*गैवीनाथ स्टेडियम में नाली निर्माण हुआ या सरकारी पैसे को मिट्टी में दफन कर दिया गया?*
गैवीनाथ स्टेडियम परिसर में लाखों रुपये की लागत से नाली निर्माण कराए जाने की बात सामने आ रही है, लेकिन आज स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि पुरानी नालियों का अस्तित्व तक दिखाई नहीं देता। पांच दिवसीय मेले के दौरान जेसीबी से फिर नालियों की खुदाई कराई जा रही है। सवाल यह है कि जब पहले नालियां बनाई गई थीं, तो वे कहां गईं? क्या उनका कोई रिकॉर्ड है? क्या निर्माण की गुणवत्ता की जांच हुई थी? या फिर पुराने निर्माण को मिट्टी के नीचे दबाकर नए काम की शुरुआत कर दी गई?
*यह सिर्फ नाली का मामला नहीं, जनता के पैसे की जवाबदेही का सवाल है*!
एक तरफ ऐसे स्थानों पर नाली निर्माण के नाम पर खर्च होने के सवाल उठ रहे हैं, वहीं कलवलिया मोड़ से कैरियर गाड़ी स्कूल तक नाली की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग पर नाली बनती तो वास्तव में लोगों के काम आती। लेकिन यहां जनता को आश्वासन के अलावा क्या मिला? आखिर जरूरत वाले स्थानों पर विकास की रफ्तार क्यों थम जाती है?
*कृषि मंडी के सामने बोर हुआ, लेकिन पानी आज भी नदारद!*
कृषि मंडी उपज के सामने बोर कराया गया, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार आज तक उसमें मोटर नहीं डाली गई और न ही पाइपलाइन बिछाई गई। सवाल सीधा है—जब पानी की व्यवस्था ही नहीं करनी थी, तो बोर कराने पर सरकारी धन क्यों खर्च किया गया? क्या केवल निर्माण करा देना ही विकास की परिभाषा बन गई है?
*स्टेडियम का सपना अधूरा, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल!*
बिरसिंहपुर में स्टेडियम सहित कई निर्माण कार्यों की स्थिति को लेकर नागरिकों में नाराजगी है। जनता पूछ रही है कि आखिर निर्माण कार्यों की निगरानी कौन करता है? इंजीनियरों की जिम्मेदारी क्या सिर्फ फाइलों में हस्ताक्षर करने तक सीमित है या मौके पर जाकर गुणवत्ता देखना भी उनका काम है?
*अब जवाब चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं!*
नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों से जनता के कुछ सीधे सवाल हैं—
* गैवीनाथ स्टेडियम में नाली निर्माण पर कितनी राशि खर्च हुई?
* पुरानी नालियों की वर्तमान स्थिति क्या है और वे दिखाई क्यों नहीं दे रही हैं?
* निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच किस अधिकारी ने की?
* कृषि मंडी के सामने बोर में मोटर और पाइपलाइन कब लगेगी?
* कलवलिया मोड़ से कैरियर गाड़ी स्कूल तक नाली निर्माण कब कराया जाएगा?
निर्माण कार्यों के ठेकेदारों और संबंधित इंजीनियरों की जवाबदेही कब तय होगी?
*कलवलिया मोड़ से कैरियर गाड़ी स्कूल तक नाली निर्माण कब कराया जाएगा?*
निर्माण कार्यों के ठेकेदारों और संबंधित इंजीनियरों की जवाबदेही कब तय होगी?
*सबसे बड़ा सवाल:*
जिस जनता के टैक्स से नगर परिषद का खजाना भरता है, उसी जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? विकास के नाम पर पैसा खर्च होने के बाद भी यदि नाली, पानी और स्टेडियम जैसी सुविधाएं अधूरी हैं, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
अब जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच हो, निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, खर्च की गई राशि का हिसाब सार्वजनिक किया जाए और जहां भी लापरवाही या अनियमितता प्रमाणित हो, वहां नियमानुसार कार्रवाई हो।
जनता का पैसा जनता की सुविधा के लिए है, मिट्टी में दफन करने के लिए नहीं!
*बिरसिंहपुर की जनता अब सवाल पूछ रही है—साहब, विकास की फाइलों में जो नालियां बह रही हैं, वे जमीन पर आखिर दिखाई क्यों नहीं देतीं?*
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