
सिद्धार्थनगर। जिले में पहली बार कालानमक धान के खेतों का जियो टैगिंग सर्वे करके रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उसके बाद आसानी से पता लगेगा कि कितने किसानों ने कितने रकबे में कालानमक प्रजाति के धान की खेती की है, उनके उत्पादन कितना होगा? इसके साथ ही क्यूआर कोड जनरेट किया जाएगा, जिसके माध्यम से देश-विदेश का कोई भी ग्राहक किसानों से सीधे संपर्क करके कालानमक धान खरीद सकता है। ऐसी पहल से बिचौलियों की दखल कम हो जाएगी और कालानमक चावल के मिलावट के धंधे पर अंकुश लगेगा।
साल 2018 में कालानमक चावल को एक जिला एक उत्पाद में शामिल किया गया तो ब्रांडिंग-मार्केटिंग से मांग और कीमत में लगातार बढ़ोतरी होती गई। इसमें मिलावटखोरों ने काली कमाई का धंधा निकाला, जिससे कालानमक चावल की साख गिर रही थी। कालानमक चावल के निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड बनने के बाद जिले में चावल की गुणवत्ता की जांच की प्रयोगशाला नहीं बन पाई। ऐसी स्थिति में जियो टैगिंग सर्वे कराया जा रहा है। कलानमक धान व चावल का रेट तय किया जायेगा और बाजार में उसे आसानी से बेचा जा सकता है जिससे किसान को कोई समस्या न हो।







