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तुर्किये-लंदन तक फैला नेटवर्क, गाजियाबाद से गिरफ्तार “फर्जी राजदूत” हर्षवर्धन जैन—करोड़ों की हवाला ठगी में बड़ा खुलासा

गाजियाबाद से उठा पर्दा, फर्जी दूतावास से जुड़े तार लंदन-तुर्किये तक

गाजियाबाद के कविनगर निवासी हर्षवर्धन जैन की गिरफ्तारी के बाद फर्जी राजनयिक नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। एसटीएफ की कार्रवाई में सामने आया है कि जैन कोई मामूली ठग नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय हवाला और फर्जीवाड़ा रैकेट का अहम हिस्सा है।


🌍 लंदन में बैठा मास्टरमाइंड एहसान अली सैयद—शातिर ठगों की जोड़ी

इस नेटवर्क का दूसरा बड़ा चेहरा है एहसान अली सैयद, जो वर्तमान में लंदन में है और तुर्किये की नागरिकता ले चुका है।
जांच में सामने आया कि हर्षवर्धन और एहसान ने मिलकर कई शेल कंपनियाँ बनाईं और उन्हें माइक्रोनेशन (स्वघोषित देश) के नाम पर फर्जी दूतावास घोषित किया।


💰 हवाला के ज़रिए करोड़ों की हेराफेरी, विदेशों में बैंक खातों का खुलासा

एसटीएफ को अब तक हर्षवर्धन जैन के विदेशों में 10 बैंक खातों का पता चला है।
इन खातों में हुए ट्रांजेक्शनों की जानकारी के लिए संबंधित बैंकों से डिटेल मांगे जा रहे हैं।
ऐसा संदेह है कि इन खातों के माध्यम से ही अंतरराष्ट्रीय हवाला लेन-देन किया गया।


⚖️ एसटीएफ ने कोर्ट में की रिमांड की मांग, जल्द होंगे और खुलासे

एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को आरोपी को रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है।
अब हर्षवर्धन से गहराई से पूछताछ कर अन्य अंतरराष्ट्रीय लिंक, सहयोगी और वित्तीय जाल की परतें खोली जाएंगी।


🔎 क्या है माइक्रोनेशन का खेल?

हर्षवर्धन और उसके नेटवर्क ने स्वयं को फर्जी देश का राजदूत घोषित किया और उसका दूतावास खोलकर आम लोगों को गुमराह किया।
यह दूतावास किसी मान्यता प्राप्त देश या संस्था से अधिकृत नहीं था, बल्कि इसका मकसद केवल धोखाधड़ी और हवाला कारोबार करना था।


⚠️ अब तक का घटनाक्रम एक नजर में:

📍 गिरफ्तारी: मंगलवार देर रात, गाजियाबाद के कविनगर से

🌐 नेटवर्क: लंदन, तुर्किये, और भारत में फैला फर्जीवाड़ा

🏢 शेल कंपनियाँ: कई देशों में पंजीकृत, हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए

🏦 बैंक खाते: विदेशों में 10 से अधिक, ट्रांजेक्शन की जांच शुरू

⚖️ अगला कदम: एसटीएफ की रिमांड के बाद और बड़े खुलासों की उम्मीद


❗ इस मामले ने देश की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। अब देखना यह है कि क्या इस अंतरराष्ट्रीय जाल के पीछे छिपे और नाम सामने आएंगे या जाँच वहीं थम जाएगी जहां हर बार थम जाती

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