सिद्धार्थनगर 

सिद्धार्थनगर : क्या फाइनेंस कंपनी से लोन लेने के बाद गुलामी के जंजीर में बंध जातीं हैं महिलाएं? कर्मचारी, महिला के घर क्यों दिखाया तानाशाही जिससे महिला ने खा लिया जहरीला पदार्थ!

सिद्धार्थनगर

जनपद सिद्धार्थनगर में लोन का किश्त जमा न करने पर कर्मचारी द्वारा प्रताड़ित करने पर महिला ने खा लिया जहरीला पदार्थ 

लोटन कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लोहरौली में जीरावती नाम की एक महिला अपनी आवश्यकता के लिए कैशपाॅर फाइनेंस कंपनी से 2 लाख रुपए का लोन निकाली थी। परिजनों की मानें तो वह संस्था द्वारा निर्धारित किश्तों को नियमित रूप से अदा कर देती थी, लेकिन हालही में पड़े किश्त को जमा करने के लिए महिला के पास पैसों की कमी पड़ गई, तत्काल पति के बाहर जानें से ये समस्या और भी विकट हो गया था,

जिससे वह किश्त जमा करने में असक्षम थी। ऐसे दौर में कैशपाॅर फाइनेंस कंपनी के एक तानाशाह कर्मचारी आंतें हैं और महिला को प्रताड़ित करना शुरू कर देते हैं। प्रताड़ना में कैशपाॅर फाइनेंस कंपनी का कर्मचारी इस हद तक पहुंच गया कि महिला को जहरीला पदार्थ खानें तक का क़दम उठा लेना पड़ा! तत्काल मौके पर परिजनों ने नाज़ुक हालत में महिला को लोटन सीएचसी लें गए, जहां से उसे जिला अस्पताल सिद्धार्थनगर रेफर कर दिया गया था। फिलहाल अब महिला की स्थिति में सुधार देखते हुए चिकित्सकों ने महिला को घर भेज दिया है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या परेशानियां और समस्याएं किसी एक पर आतीं हैं? माना कि महिला एक किश्त जमा नहीं कर पायी, उसके बदले में कैशपाॅर फाइनेंस कंपनी का एक कर्मचारी क्या महिला के इज्जतों को निलाम कर देगा? कोई भी महिला किसी भी कंपनी से लोन निकालती है तो उस पैसे को ब्याज सहित लौटा देती है, तो वह कंपनी और उसके कर्मचारी उस महिला पर अहसान करतें हैं क्या? क्या कैशपाॅर फाइनेंस कंपनी का अपना संविधान हैं क्या जिसमें किश्त न जमा कर पानें पर महिलाओं की इज्जत नीलाम करनें का प्राविधान है? सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आजादी के बाद भी ऐसे कर्मचारी इन मासूम महिलाओं पर इस तरह के गुलामी की जंजीर में कब-तक बांधते रहेंगे?

लोगों के ऐसे कई सवाल पुलिसिया कार्रवाई को इशारा कर रहें हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में पुलिस उस महिला को कब-तक न्याय दिलाकर आजादी का अहसास करायेगी?

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