हर्रैया में ‘मिट्टी माफिया’ का तांडव: प्रशासन की चुप्पी, आखिर किसकी शह पर हो रहा यह खेल?

अजीत मिश्रा (खोजी(
जमीन के सीने पर माफियाओं का वार, हर्रैया में लूट का ‘मिट्टी कांड’ जारी
- प्रशासनिक मौन पर उठ रहे सवाल: क्या खनन माफियाओं के आगे नतमस्तक है तहसील प्रशासन?
- क्या हर्रैया के अधिकारियों की आँखों पर बंधी है माफियाओं ने पट्टी?
- खनन माफियाओं का ‘नंगा नाच’, कानून और प्रशासन बेबस!
- आईजीआरएस पर शिकायत के बाद भी जारी है अवैध खनन; आखिर कब जागेगा ज़िम्मेदार प्रशासन?
- जनता की पुकार, माफियाओं की सरकार? बरदिया लोहौर में अवैध खनन से बर्बाद हो रहे खेत-खलिहान!
दुबौलिया (बस्ती)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करती है, लेकिन बस्ती जनपद की हर्रैया तहसील के बरदिया लोहौर गाँव में यह दावा मिट्टी में मिलता नजर आ रहा है। यहाँ अवैध खनन माफियाओं ने सरकारी नियमों को ताक पर रखकर न केवल जमीन का सीना छलनी कर दिया है, बल्कि स्थानीय प्रशासन को भी चुनौती दे दी है। 7 जून 2026 को आईजीआरएस (जनसुनवाई) पोर्टल पर दर्ज हुई एक शिकायत ने इस पूरे खेल की कलई खोल दी है।
नियमों की धज्जियां, माफियाओं की मनमर्जी
शिकायतकर्ता चंदन सिंह ने जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि ग्राम पंचायत बरदिया लोहौर में खनन पट्टे की जो आड़ ली जा रही है, वह महज एक दिखावा है। पट्टे की निर्धारित सीमा (गाटा संख्या) के भीतर खनन करने के बजाय, माफियाओं ने आस-पास की उपजाऊ कृषि भूमि को अपना लक्ष्य बना लिया है। बिना अनुमति के बड़े पैमाने पर हो रहा मिट्टी का यह खनन न केवल सरकारी राजस्व को चूना लगा रहा है, बल्कि ग्रामीणों के भविष्य को भी गर्त में धकेल रहा है।
प्रशासन की मिलीभगत या माफियाओं का खौफ?
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या क्षेत्र के जिम्मेदारों को इस भारी-भरकम खुदाई की भनक नहीं है? ग्रामीणों का कहना है कि खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिनदहाड़े जेसीबी और डंपरों का संचालन कर रहे हैं। चंदन सिंह के अनुसार, उन्होंने पूर्व में भी संबंधित अधिकारियों को मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया था, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई। शिकायत का समाधान होने के बजाय, खनन की रफ्तार और तेज हो गई है। आखिर कौन है वो ‘अदृश्य शक्ति’ जो अधिकारियों को कार्रवाई करने से रोक रही है?
क्या होगा तबाही का मंजर?
अवैध खनन के कारण बरदिया लोहौर में तबाही की पटकथा लिखी जा चुकी है:
- पर्यावरण का संतुलन: मिट्टी के अनियंत्रित उठाव से भू-गर्भीय जलस्तर पर असर पड़ने की प्रबल संभावना है।
- कृषि भूमि का विनाश: उपजाऊ मिट्टी के खनन से किसानों की जमीनें अनुपजाऊ हो रही हैं, जिससे ग्रामीण अपनी आजीविका खो रहे हैं।
- सड़कों की दुर्दशा: भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण मार्ग जगह-जगह धंस गए हैं और धूल-मिट्टी से जनजीवन अस्त-व्यस्त है।
अब आर-पार की लड़ाई
राजस्व एवं आपदा विभाग के पाले में पहुंची यह शिकायत अब एक ‘लिटमस टेस्ट’ है। क्या विभाग के अधिकारी कागजों के पुलिंदे में इस मामले को दबा देंगे, या फिर माफियाओं के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई कर अपना इकबाल बुलंद करेंगे?
जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन की ‘कार्रवाई’ महज एक रस्मअदायगी होगी या वास्तव में अवैध खनन की कमर तोड़ी जाएगी? यदि शासन-प्रशासन इस लूट को नहीं रोकता है, तो ग्रामीणों के पास सड़कों पर उतरने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचेगा।
क्या अवैध खनन के ‘खेले’ का पर्दाफाश होगा या माफिया फिर एक बार कानून को चकमा देने में सफल रहेंगे? यह सवाल हर्रैया की जनता के मन में गूंज रहा है।
[संपादकीय नोट: यह खबर जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत संख्या के संदर्भ में दी गई है। प्रशासन की ओर से अब तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है।]
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।







