बस्ती में ‘हरा सोना’ लूट रहे माफिया: वन विभाग की मिलीभगत या प्रशासनिक नाकामी?

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में ‘हरा सोना’ लूट रहे लकड़ी माफिया: वन विभाग की चुप्पी या मिलीभगत?
- बस्ती का ‘लकड़ी गैंग’ बेखौफ: बिना परमिट उजड़ रहे बगीचे, क्या विभाग कर पाएगा माफियाओं पर नकेल?
- खाकी की नाक के नीचे खुलेआम पेड़ों का ‘कत्ल’, माफिया की दबंगई के आगे नतमस्तक वन विभाग?
बस्ती: जिले के कप्तानगंज वन रेंज के अंतर्गत दुबौलिया ब्लॉक का सिटकहवा गाँव इन दिनों लकड़ी माफियाओं की अवैध गतिविधियों का गढ़ बना हुआ है। सरकार द्वारा चिलबिल और बड़हल जैसी छूट वाली प्रजातियों के कटान की मिली छूट का फायदा उठाकर माफियाओं ने प्रतिबंधित पेड़ों पर आरी चलानी शुरू कर दी है। यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि सरकारी खजाने को भी लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।

प्रतिबंधित पेड़ों का हो रहा बेखौफ सफाया
सिटकहवा में माफियाओं ने छूट वाली प्रजातियों की आड़ में आम, महुआ और गुलर जैसे संरक्षित और प्रतिबंधित पेड़ों को निशाना बनाया है। सूत्रों की मानें तो यह कोई पहली घटना नहीं है। अपने दबंगई के बल पर ये माफिया पहले भी कई बार बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित पेड़ों का कटान कर चुके हैं। ताज्जुब की बात यह है कि दिनदहाड़े हरे-भरे पेड़ों की बलि दी जा रही है और वन विभाग की नाक के नीचे यह खेल बदस्तूर जारी है।
क्या वन विभाग सो रहा है?
आखिर वन विभाग के अधिकारियों की नाक के नीचे माफियाओं को प्रतिबंधित पेड़ों को काटने का साहस कैसे हुआ? यह प्रश्न पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि बिना विभाग की मिलीभगत के इतनी बड़ी संख्या में हरे पेड़ों का कटान संभव ही नहीं है। विभाग की चुप्पी ने माफियाओं का मनोबल सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है, जिससे उनका डर पूरी तरह खत्म हो गया है।
रेंजर के आदेश के बाद अब टिकी सबकी निगाहें
सोशल मीडिया पर अवैध कटान की खबरें वायरल होने के बाद, रेंजर राजू प्रसाद ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने बिना परमिट के कटे प्रतिबंधित पेड़ों की जांच कर सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। अब सवाल यह है कि क्या यह जांच केवल खानापूर्ति साबित होगी या रेंजर साहब वाकई लकड़ी माफियाओं के खिलाफ कोई सख्त नजीर पेश करेंगे?
क्षेत्र की जनता अब इस बात का इंतजार कर रही है कि क्या दोषी माफियाओं पर मुकदमा दर्ज होगा और उनसे सरकारी नुकसान की भरपाई की जाएगी, या फिर एक बार फिर फाइलों को दबाकर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?
अवैध कटान से जुड़े कुछ मुख्य तथ्य:
- क्षेत्र: ग्राम पंचायत सिटकहवा, दुबौलिया ब्लॉक (कप्तानगंज रेंज)।
- अवैध कटान: आम, महुआ, गुलर जैसे प्रतिबंधित पेड़।
- आड़: छूट वाली प्रजातियों (चिलबिल, बड़हल) के कटान का बहाना।
- प्रभाव: पर्यावरण को भारी नुकसान और सरकारी खजाने को लाखों का चूना।
इस मामले में आगे की कार्यवाही पर पूरी जनता की नजरें टिकी हुई हैं। क्या वन विभाग माफियाओं पर नकेल कस पाएगा, या फिर ये माफिया इसी तरह सरकारी संपत्ति को लूटते रहेंगे?
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