बस्ती में वन माफिया का तांडव: रुधौली में रात के अंधेरे में साफ किए गए शीशम के पेड़, विभाग मौन।

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: रुधौली में बेखौफ वन माफिया, अवैध कटान से उजड़ रहे हरे-भरे शीशम
- कागजों पर पर्यावरण, धरातल पर जंगल राज: रुधौली में माफिया के आगे ‘बेबस’ दिखा वन विभाग।
- सोनल वर्मा के क्षेत्र में वन माफियाओं का ‘राज’: क्या मिलीभगत से उजड़ रही है बस्ती की वन संपदा?
- रुधौली अवैध कटान कांड: ग्रामीणों की सूचना के बाद भी क्यों नहीं पहुंची टीम? जिम्मेदार कौन?
रुधौली, बस्ती: जनपद के रुधौली क्षेत्र में वन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे रात के अंधेरे में सरकारी और निजी वन संपदा को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला करमा कला के ओढ़वलिया गांव से सामने आया है, जहां घंटों तक आरी की गूंज सुनाई देती रही, लेकिन वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं टूटी। इस अवैध कटान ने विभागीय कार्यप्रणाली और गश्त की पोल खोलकर रख दी है।
रात के अंधेरे में ‘ऑपरेशन सफाया’
सूत्रों के अनुसार, ओढ़वलिया गांव में माफियाओं ने रात के सन्नाटे का फायदा उठाते हुए बेशकीमती शीशम के पेड़ों को अपना निशाना बनाया। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध कटान की सूचना मिलने के बावजूद वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची। जब तक स्थानीय लोग जागे, तब तक माफिया लकड़ी लेकर रफूचक्कर हो चुके थे।
बाघनगर के माफिया की चर्चा, सवालों के घेरे में विभाग
इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि बाघनगर का लकड़ी माफिया नोमान अहमद अपने नेटवर्क के जरिए बस्ती के इस इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध कटान करवा रहा है। स्थानीय लोग दबी जुबान में कह रहे हैं कि बिना मिलीभगत के इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों का सफाया संभव नहीं है।
इस घटना के बाद से वन क्षेत्राधिकारी (RFO) सोनल वर्मा के कार्यक्षेत्र पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि धरातल पर वन माफियाओं का कब्जा है।
ग्रामीणों में आक्रोश, उच्च स्तरीय जांच की मांग
अवैध कटान से आहत ग्रामीणों ने जिलाधिकारी (DM) और वन विभाग के उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भेजकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि समय रहते इन माफियाओं पर लगाम नहीं कसी गई, तो क्षेत्र का पर्यावरण पूरी तरह तबाह हो जाएगा।
विभाग की चुप्पी बनी चर्चा का विषय
जब इस मामले में वन क्षेत्राधिकारी सोनल वर्मा से बात की गई, तो उन्होंने जांच का आश्वासन दिया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आश्वासन पहले भी मिल चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है।
बड़ा सवाल यह है कि:
- क्या विभागीय मिलीभगत के बिना रात के अंधेरे में शीशम का कटान संभव है?
- पर्यावरण बचाने का दावा करने वाला वन विभाग माफियाओं के आगे इतना बेबस क्यों है?
- क्या जिलाधिकारी इस मामले में सख्त रुख अपनाकर अवैध कटान के इस खेल पर अंकुश लगा पाएंगे?
क्षेत्र की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है, बल्कि वह उन चेहरों के बेनकाब होने का इंतजार कर रही है, जिनकी शह पर हरियाली को उजाड़ा जा रहा है।
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