गोरखपुर: डीआईजी बंगले के पास ‘नकली’ साम्राज्य; ब्रांडेड पैकेटों में परोसा जा रहा था धीमा ज़हर!

अजीत मिश्रा (खोजी)
DIG बंगले के पास सेहत का सौदा: गोरखपुर में लाखों के नकली FMCG उत्पादों का महाभंडाफोड़!
- ब्रांडेड पैकेटों में ‘धीमे ज़हर’ का अवैध कारोबार; नामी कंपनियों के नाम पर जनता की ज़िंदगी से खिलवाड़ कर रहा था सप्लायर अभिषेक गुप्ता।
- गोरखपुर में ‘नकली’ माल का महा-भंडाफोड़: अभिषेक गुप्ता के गोदाम से बरामद हुई जानलेवा खेप।
- सावधान! आपकी रसोई में तो नहीं नकली मसाले-चाय? गोरखपुर पुलिस ने पकड़ी मिलावटी सामानों की बड़ी खेप।
गोरखपुर।
कानून के रखवालों की नाक के ठीक नीचे जब अपराध फलता-फूलता है, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। गोरखपुर के बिलंदपुर क्षेत्र में वीआईपी इलाके (डीआईजी बंगले के पास) से जो खबर आई है, उसने हर नागरिक को झकझोर कर रख दिया है। शनिवार को पुलिस ने एक बड़े सप्लायर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में नकली FMCG (Fast-Moving Consumer Goods) सामान बरामद किया है। यह कार्रवाई महज़ एक छापेमारी नहीं, बल्कि आम जनता की रसोई और सेहत में पैठ बना चुके एक जानलेवा रैकेट का पर्दाफाश है।

खुफिया इनपुट पर दबोचा गया मुख्य सरगना
यह कामयाबी पुलिस की अपनी मुस्तैदी से ज्यादा गुरुग्राम स्थित CheQ IP Solutions Pvt. Ltd. की सटीक खुफिया जानकारी के हिस्से जाती है। सूचना के आधार पर जाल बिछाकर पुलिस ने मुख्य आरोपी अभिषेक गुप्ता को उस वक्त दबोचा, जब वह अपने वाहन में नकली उत्पादों की एक बड़ी खेप भरकर बाजार में खपाने जा रहा था। पुलिस ने मौके पर ही वाहन को जब्त कर लिया, लेकिन असली खौफनाक मंजर तब सामने आया जब आरोपी के गोदाम की तलाशी ली गई।
रसोई से लेकर दवाइयों तक… सब कुछ नकली!
आरोपी के गोदाम में नामी-गिरामी ब्रांड्स के रैपर में पैक किया गया कचरा मिला। ब्रांडेड कंपनियों के नकली होलोग्राम और पैकेजिंग देखकर असली-नकली का फर्क करना नामुमकिन था। गोदाम से जब्त किए गए सामानों की सूची डराने वाली है:
- रसोई का ज़हर: एवरेस्ट मसाले और टाटा चाय (जिन्हें हर घर में बड़े चाव से इस्तेमाल किया जाता है)।
- दवा और राहत के नाम पर धोखा: पेट दर्द और गैस के लिए ‘ईनो’ (Eno) और दर्द निवारक ‘आयोडेक्स’ (Iodex)।
- घरेलू सुरक्षा उत्पाद: मच्छरों से बचाने वाला ‘गुड नाइट’ और टॉयलेट क्लीनर ‘हैरपिक’।
- व्यसन का अवैध धंधा: भारी मात्रा में नकली ‘गोल्ड फ्लेक’ सिगरेट।
तीखा सवाल: यह व्यापारिक धोखाधड़ी है या ‘मर्डर’ की साजिश?
संपादकीय टिप्पणी:
इसे केवल कॉपीराइट का उल्लंघन या टैक्स चोरी का मामला मानकर ठंडे बस्ते में नहीं डाला जा सकता। यह सीधे तौर पर जन स्वास्थ्य के साथ किया जा रहा खिलवाड़ और ‘मर्डर’ की सोची-समझी साजिश है। जो बीमार व्यक्ति राहत के लिए ईनो या आयोडेक्स का इस्तेमाल कर रहा था, उसे क्या पता कि वह चंद रुपयों के लालच में अंधे हो चुके एक अपराधी के जाल में फंस रहा है? खाने वाले मसालों और चायपत्ती में मिलाए जाने वाले केमिकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को न्यौता दे रहे हैं।
प्रशासन की सुस्ती और सप्लायरों के बुलंद हौसले
सबसे बड़ा सवाल यह है कि डीआईजी बंगले के इतने करीब होने के बावजूद यह अवैध कारोबार लंबे समय से कैसे चल रहा था? क्या स्थानीय पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की आंखें तब तक बंद रहती हैं, जब तक कोई बाहरी एजेंसी आकर इनपुट न दे?
अधिकारियों का कहना है कि यह सामान आम जनता की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था और कानूनी कार्रवाई जारी है। लेकिन जरूरत इस बात की है कि केवल अभिषेक गुप्ता की गिरफ्तारी पर ही इतिश्री न कर ली जाए। इस पूरे रैकेट के पीछे जो बड़े मगरमच्छ हैं—जो कच्चा माल सप्लाई करते थे और जो दुकानदार इस नकली माल को असली बताकर जनता को बेच रहे थे—उन्हें भी बेनकाब कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए।
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