पेट्रोल पंप या ‘अंधेर नगरी’? सल्टौआ में सुविधाओं के नाम पर जनता से उगाही और बदतमीजी

अजीत मिश्रा (खोजी)
पेट्रोल पंप या उगाही का अड्डा? सल्टौआ में सुविधाओं के नाम पर जनता से धोखा
- तेल भरवाओ और अपमान सहो: सल्टौआ के इस पेट्रोल पंप पर ‘ग्राहक’ नहीं, ‘मजबूर’ आते हैं
- कागजों में सुविधा, धरातल पर गंदगी: क्या सल्टौआ का यह पेट्रोल पंप नियमों से ऊपर है?
- पेट्रोल पंप पर बुनियादी सुविधाओं का ‘अकाल’: क्या उपभोक्ता अधिकारों का कोई मोल नहीं?
बस्ती: क्या किसी पेट्रोल पंप का काम केवल ग्राहकों की जेब से पैसे निकलवाकर उनके वाहन की टंकी भरना है? पेट्रोलियम कंपनियों के मानक और सरकारी गाइडलाइंस तो यही कहती हैं कि एक पेट्रोल पंप को ‘सर्विस स्टेशन’ के रूप में कार्य करना चाहिए, जहाँ हवा, पानी और साफ-सुथरे शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं ग्राहकों का अधिकार हैं। लेकिन बस्ती जिले के सल्टौआ ब्लॉक स्थित भिरिया सखुईया के एक पेट्रोल पंप की असलियत इन दावों को आईना दिखा रही है। यहाँ ‘सेवा’ शब्द का अर्थ ही बदल चुका है।
सुविधाएं कागजों में, बदतमीजी हकीकत में
हैरत की बात यह है कि इस पेट्रोल पंप पर कागजों में तो हवा और बाथरूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध दिखाई गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब भी कोई ग्राहक हवा भरने या शौचालय का उपयोग करने की जहमत उठाता है, तो वहां के कर्मचारी स्पष्ट इनकार कर देते हैं। आखिर ये कैसी व्यवस्था है, जहाँ सुविधाएँ मौजूद तो हैं, लेकिन आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर?
** गंदगी का साम्राज्य और कर्मचारियों का ‘गुंडागर्दी’ वाला व्यवहार**
अगर आप शौचालय की ओर कदम बढ़ाने की हिम्मत करते हैं, तो गंदगी का ऐसा आलम है कि वहां खड़ा होना भी दूभर हो जाए। लेकिन इस बदहाली से भी बदतर है वहां के कर्मचारियों का व्यवहार। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यदि कोई ग्राहक सुविधाओं को लेकर सवाल उठा दे या शिकायत करे, तो कर्मचारी शिष्टाचार के बजाय बदतमीजी पर उतर आते हैं। ऐसा लगता है जैसे वे ग्राहकों पर अहसान कर रहे हों, न कि उन्हें सेवा दे रहे हों।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
यह केवल एक पेट्रोल पंप की समस्या नहीं है, बल्कि उस उदासीनता का प्रतीक है जो जिला प्रशासन और संबंधित पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारी ओढ़े हुए हैं।
- क्या जिला प्रशासन को इस अवैध मनमानी की खबर नहीं है?
- क्या पेट्रोलियम कंपनियों का अपने डीलरों पर कोई नियंत्रण नहीं है?
- अगर सुविधाएं नहीं देनी हैं, तो फिर पेट्रोल पंप चलाने का लाइसेंस किस आधार पर दिया गया है?
अंतिम चेतावनी
उपभोक्ता अधिकार के तहत, पेट्रोल पंप पर हवा, पानी और शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इसे ‘विकल्प’ नहीं, बल्कि ‘नियम’ माना जाना चाहिए। सल्टौआ के इस पेट्रोल पंप की मनमानी यह दर्शाती है कि यहाँ के प्रबंधन को कानून का रत्ती भर भी डर नहीं है।
समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी कागजों में सिमटी जांच रिपोर्टों से बाहर निकलें और सल्टौआ के इस पंप पर कड़ी कार्रवाई करें। यदि व्यवस्था नहीं सुधरी, तो यह केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि एक बड़े आंदोलन का आधार बनेगी। जनता अब और अधिक अपमान सहन करने को तैयार नहीं है।
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