कांठ: 12 सूत्रीय मांगों को लेकर भाकियू टिकैत ने उपजिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की दी चेतावनी


कांठ (मुरादाबाद)। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की कांठ तहसील में सोमवार को आयोजित बैठक में किसानों ने क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाया। बैठक के बाद किसानों ने उपजिलाधिकारी स्निग्धा चतुर्वेदी को 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर समस्याओं का शीघ्र समाधान कराने की मांग की।
किसानों ने कहा कि लंबे समय से विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है, लेकिन अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मांग की कि ज्ञापन में शामिल सभी बिंदुओं पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।भाकियू (टिकैत) पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो संगठन बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
बैठक एवं ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश चौधरी ऋषिपाल सिंह, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष हरदीप सिंह, तहसील अध्यक्ष चौधरी दर्शन सिंह, तहसील प्रभारी सियाराम बिश्नोई, जिला सचिव रामकला सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष अनिल कुमार उर्फ अंगद चौधरी, अनोज चौधरी, मुकेश कुमार, रामपाल सिंह, वरन सिंह, बलराज सिंह, प्रिंस चौधरी सहित बड़ी संख्या में किसान एवं संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
–इन मांगों व समस्याओं को लेकर दिया, ज्ञापन 👇
(1). कांवड़ पथ की सावन माह के लिए सफाई के नाम पर सड़क पर डाले जा रहे कूड़े को उठाकर हटाया जाना चाहिए न की JCB मशीन से खेतों में धकेल दिया जाए। जिससे प्लास्टिक और कांच जैसे दूषित और हानिकारक पदार्थ खेतों में न पहुंचे। ऐसे लोगो को नोटिस जारी कर उन्हें सड़क के किनारे कुड़ी डालने से रोका जाना चाहिए।
(2). कांवड़ पथ पर रेत के डम्प से चलने वाले डंपरों के कारण सड़क पर बहुत दूर तक मिट्टी कीचड़ का रूप ले लेती है, जिससे आने जाने वाले वाहनों और राहगीरो को बहुत खतरा हो जाता है, जिससे निरंतर धुलाई कर साफ किया जाना चाहिए।
(3). कांठ संपर्क मार्गों पर खनन और मिट्टी के डंपरों को बच्चों के स्कूल आने और जाने के समय एक निर्धारित समय के लिए रोका जाना चाहिए।
(4). गांवों मे चक मार्गो, गांव के अंदर जाने वाली सड़कों के अतिक्रमण और खेतों के मेढ़ विवाद को प्रशासन द्वारा शीघ्रता से निपटाया जाना चाहिए, जिससे बिजनौर के अलैहपुर जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
(5). कांठ बाजार में बहुत से व्यापारी ऑनलाइन भुगतान नहीं लेते, जिससे कई बार खरीददार को परेशानी का सामना करना पड़ता है, ऐसे सभी कारोबारियों को ये आदेश हो की वह UPI पेमेंट भी स्वीकार करें।
(6). सरकारी नलकूपों की भूमिगत पाईप लाईन का विस्तार किया जाए, जिससे बटवारे के कारण अलग हए खेत किसानों को भी सिंचाई हेत पानी मिल सके।
(7). विद्युत आपूर्ति शेड्यूल के अनुसार नहीं की जा रही जिसे घरेलू उपभोक्ताओं को बहुत परेशानी हो रही है।
(8). विद्युत विभाग के कर्मचारियों को उपभोक्ताओं के प्रति व्यवहार बहुत ही कटु और तानाशाही पूर्ण है, आपूर्ति का पता करने पर लाईन मेन और स्टाफ सही जानकारी नहीं देते। सबसे ज्यादा शिकायत भीकनपुर बिजली से है। उसके SDO भी कभी किसान यूनियन की समीक्षा बैठक नहीं आते है।
(9). विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त है जो बरसात के इस मौसम में किसी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
(10). कांठ टाउन के खुले जाने वाले पानी ने खादर क्षेत्र के किसानों को कंगाली के कगार पर पहुंचा दिया है, जिसका उपाय करना अति आवश्यक हो गया है।
(11). संगठन की मांग है कि कांठ में एक मृदा परीक्षण केंद्र खोला जाए।
(12). कांठ में अभी भी यूरिया की कमी बनी हुई है, जिस कारण किसान अपनी फसल को पर्याप्त खाद नहीं दे पा रहा है।
रिपोर्ट: पंकज कुमार। ✍️
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