बस्ती में साइबर ठगी का ‘राजस्थान कनेक्शन’: तीन गिरफ्तार, सीएसपी संचालक को बनाया मोहरा

साइबर ठगी का ‘राजस्थान कनेक्शन’: बस्ती में पुलिस ने दबोचा तीन सदस्यीय गिरोह, 50,950 रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा
बस्ती, 14 जुलाई 2026।
- ‘इलाज’ के नाम पर साइबर ठगी: बस्ती में सक्रिय हुआ अंतर्राज्यीय गिरोह, 50 हजार की धोखाधड़ी में तीन दबोचे गए
- सावधान! आपकी सादगी का फायदा उठा सकते हैं साइबर ठग: बस्ती में तीन गिरफ्तार, एक फरार
बस्ती साइबर क्राइम पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई साइबर मुख्यालय, लखनऊ द्वारा संचालित ‘साइबर वज्र’ अभियान के तहत की गई है। इस मामले में राजस्थान से जुड़े साइबर नेटवर्क के तार सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल गई है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह मामला ग्राम आमा (पोस्ट जिनवा) निवासी संदीप वर्मा की शिकायत पर दर्ज किया गया। संदीप जिनवा चौराहे पर जन सेवा केंद्र (सीएसपी) संचालित करते हैं। शिकायतकर्ता ने बताया कि 25 और 27 अप्रैल 2026 को कुछ युवक उनकी दुकान पर पहुंचे। उन्होंने अपनी मां और परिजनों के गंभीर इलाज का हवाला देते हुए संदीप की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया और मजबूरी का फायदा उठाकर अपने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए संदीप के बिजनेस क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया।
इन ठगों ने संदीप के क्यूआर कोड पर कुल 50,950 रुपये का ऑनलाइन भुगतान कराया और बदले में संदीप से नकद राशि ले ली। जब कुछ समय बाद संबंधित बैंक खातों पर ‘होल्ड’ लगा, तब संदीप को समझ आया कि वे साइबर जालसाजों का शिकार हो चुके हैं।
आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों की मदद से पहचान सुनिश्चित की और मंगलवार सुबह करीब 9:45 बजे अमहट पुल के पास घेराबंदी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
- विकास चौधरी उर्फ कार्तिक, निवासी माधवापुर, थाना सोनहा।
- राज यादव, निवासी वंजरिया, थाना सोनहा।
- महेन्द्र चौधरी उर्फ सत्या, निवासी बनकटवा, थाना सोनहा।
पुलिस ने इनके पास से दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन, ठगी में प्रयुक्त दो मोहर और 1,000 रुपये नकद बरामद किए हैं। इनका चौथा साथी अभिजीत शर्मा अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
साइबर नेटवर्क का ‘राजस्थान कनेक्शन’
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम को ठिकाने लगाने के लिए सीएसपी संचालकों को माध्यम बनाते थे। जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिन बैंक खातों से पैसा ट्रांसफर किया गया था, वे पहले से ही साइबर अपराधों के कारण पुलिस और बैंक की ‘वॉचलिस्ट’ में थे और उन पर होल्ड लगा था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के असली संचालक कौन हैं और राजस्थान से संचालित इस संगठित गिरोह का बस्ती के इन आरोपियों के साथ क्या संबंध है।
पुलिस की कार्यप्रणाली और मुकदमा
साइबर क्राइम थाना बस्ती में मु0अ0सं0-17/2026 के तहत धारा 319(2), 318(4) बीएनएस तथा 66-डी आईटी एक्ट के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। इस पूरी कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक साइबर क्राइम राम कुमार राजभर, निरीक्षक भगवान सिंह, हेड कांस्टेबल अंगद मौर्या, ऋषिवेद तिवारी, पवन कुमार यादव और कांस्टेबल अशोक चौहान की टीम की अहम भूमिका रही।
क्या कहते हैं अधिकारी?
क्षेत्राधिकारी सदर सतेंद्र भूषण त्रिपाठी ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है। डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन और बैंकिंग ट्रांजेक्शन के आधार पर पुलिस इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। जल्द ही फरार आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के खिलाफ भी सख्त विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अजीत मिश्रा (खोजी)
मंडल ब्यूरो प्रमुख, वंदे भारत लाईव टीवी न्यूज
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