महुली बाज़ार: व्यवस्था का ‘नाला’, जनता बेहाल और प्रशासन बेखबर!

संपादकीय: महुली बाज़ार की बदहाली, व्यवस्था की ‘अंधेरगर्दी’ का जीता-जागता सबूत
- महुली बाज़ार जलभराव: नन्हे बच्चों की जान जोखिम में, जिम्मेदार मौन क्यों?
- बीमारी का अड्डा बना महुली मुख्य मार्ग, प्रशासन की चुप्पी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश।
- 13 दिनों से घरों में कैद महुली बाज़ार की जनता; निकासी ठप, शासन-प्रशासन गायब।
- नाली पाटने से टूटा संपर्क, महुली बाज़ार के मुख्य मार्ग पर नारकीय स्थिति।
महुली। लोकतंत्र में सड़क, नाली और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं नागरिक का अधिकार हैं, लेकिन महुली बाज़ार की वर्तमान स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि यहां की व्यवस्था पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है। नाथनगर–महुली मार्ग से महुली बाज़ार को जोड़ने वाले मुख्य रास्ते पर पिछले 13 दिनों से फैला गंदा पानी केवल एक जलभराव की समस्या नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन की संवेदनहीनता और अक्षमता का खुला दस्तावेज है।
विकास के दावों के बीच घुटता दम
जब राज्य और केंद्र सरकारें स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत का ढिंढोरा पीट रही हैं, तब महुली बाज़ार का यह प्रमुख मार्ग नारकीय जीवन की तस्वीर पेश कर रहा है। गंदा पानी सड़क पर जमा है, जिसमें से उठती दुर्गंध ने दुकानदारों का धंधा चौपट कर दिया है और आसपास के निवासियों का जीना दूभर कर दिया है। सबसे भयावह स्थिति स्कूली बच्चों की है, जो अपनी जान जोखिम में डालकर, कीटाणुओं से भरे इस दूषित पानी से होकर स्कूल जाने को विवश हैं। क्या प्रशासन को किसी बड़ी अनहोनी या किसी गंभीर महामारी के फैलने का इंतजार है?
जिम्मेदार कौन?
सवाल यह है कि आखिर इस नाली को पाटने की अनुमति किसने दी? और अगर यह अनधिकृत है, तो पिछले 13 दिनों से प्रशासन की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी? जनता द्वारा टैक्स का भुगतान व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए किया जाता है, न कि सड़कों को तालाब में तब्दील होते हुए देखने के लिए।
स्थानीय जन प्रतिनिधियों की खामोशी इस प्रशासनिक विफलता में उनकी मूक सहमति की तरह है। महुली बाज़ार की जनता आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। व्यापार मंडल हो या आम ग्रामीण, सभी ने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन नतीजा केवल ‘आश्वासन’ ही रहा।
त्वरित कार्रवाई की मांग
व्यवस्था का मूल काम समस्याओं का समाधान करना है, न कि उन्हें नजरअंदाज करना। यदि बच्चों की सुरक्षा और जनता की सुविधा ही प्राथमिकताओं में नहीं है, तो फिर प्रशासनिक मशीनरी का औचित्य ही क्या है?
हम प्रशासन से मांग करते हैं कि:
- तत्काल प्रभाव से जलजमाव की निकासी सुनिश्चित की जाए और नाली को पुनर्जीवित किया जाए।
- जलभराव के कारण होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए तत्काल स्वच्छता अभियान चलाया जाए।
- जिम्मेदार अधिकारियों और अवैध अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।
महुली बाज़ार की जनता अब और इंतजार नहीं कर सकती। प्रशासन को जागना होगा, क्योंकि देर से की गई कार्रवाई अक्सर तब होती है जब कोई बड़ी त्रासदी घट चुकी होती है।
क्या आपको लगता है कि स्थानीय प्रशासन की इस अनदेखी के लिए जवाबदेही तय करने का समय आ गया है, और इस समस्या को लेकर और किस तरह का दबाव बनाया जा सकता है?
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