चिलमा बीट में पेड़ों की कटान जारी: क्या वन विभाग की मिलीभगत से पल रहे हैं माफिया?
क्या चिलमा बीट में जारी पेड़ों की इस अवैध कटान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई सख्त विभागीय कार्रवाई होगी, या वन माफिया इसी तरह पर्यावरण का नुकसान करते रहेंगे?
अजीत मिश्रा (खोजी)
चिलमा बीट: वन विभाग की मिलीभगत या लापरवाही? धड़ल्ले से कट रहे प्रतिबंधित हरे पेड़
- अधिकारी अनजान, माफिया मेहरबान: आखिर कब रुकेगा चिलमा बीट में पर्यावरण का विनाश?
- रेंजर के निर्देश बेअसर: क्यों कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं चिलमा बीट के प्रभारी?
- वन विभाग की शह पर ‘हरा सोना’ साफ: दुबौलिया में नियमों की उड़ रही धज्जियां
- सागौन और आम के पेड़ों का कत्लेआम: वन दरोगा और रक्षक की लापरवाही से माफिया बेखौफ
- दुबौलिया में जंगलराज: माफियाओं के आगे नतमस्तक वन विभाग, हरे पेड़ों पर चल रही कुल्हाड़ी
दुबौलिया, बस्ती: विकासखण्ड दुबौलिया के चिलमा बीट में पर्यावरण संरक्षण के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों की कथित लापरवाही और चुप्पी के चलते यहाँ प्रतिबंधित हरे पेड़ों की कटान का खेल धड़ल्ले से जारी है। ताजा मामला शुक्लापुर ग्राम पंचायत के तिवारी पुर और ऊँजी के कैथोलिया का है, जहाँ बिना किसी परमिट के आम और सागौन के पेड़ों का सफाया कर दिया गया।
जिम्मेदारों की चुप्पी और माफियाओं के हौसले
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि जब से चिलमा बीट का प्रभार वन दरोगा अभिषेक यादव और वन रक्षक शाश्वत दूबे ने संभाला है, तब से प्रतिबंधित पेड़ों की कटान की घटनाएं बढ़ गई हैं। कैथोलिया में सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई की सूचना के बाद भी संबंधित अधिकारियों ने केवल ‘जांच और कार्रवाई’ का आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। एक सप्ताह बीतने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होना, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस और वन विभाग का ‘लुका-छिपी’ खेल
इस अवैध कटान को लेकर जब स्थानीय लोगों ने पुलिस से गुहार लगाई, तो दुबौलिया पुलिस ने इसे वन विभाग का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया। वहीं, वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मामले से अनजान होने का स्वांग रच रहे हैं। लकड़ी माफियाओं और विभाग की इस कथित मिलीभगत के चलते माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और क्षेत्र का हरित आवरण तेजी से उजड़ रहा है।
रेंजर की नाराजगी के बाद भी जमीनी हकीकत शून्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए कप्तानगंज के रेंजर राजू प्रसाद ने नाराजगी जाहिर की है और तत्काल जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या रेंजर के निर्देश का पालन होगा, या फिर यह आदेश भी पूर्व की तरह फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?
चिलमा बीट में व्याप्त इस भ्रष्टाचार और लापरवाही ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो इस क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों का नामोनिशान मिटना तय है। स्थानीय लोग अब उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
क्या चिलमा बीट में जारी पेड़ों की इस अवैध कटान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई सख्त विभागीय कार्रवाई होगी, या वन माफिया इसी तरह पर्यावरण का नुकसान करते रहेंगे?

















