
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
राज्य सरकार महिला और वरिष्ठ नागरिकों को यात्रा में रियायत देने का ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी ओर एसटी महामंडळ की लगातार बढ़ रही किराए की मार से आम यात्रियों की जेब ढीली हो रही है।
जनवरी 2025 के बाद अब एक बार फिर एसटी के किराए में बढ़ोतरी लागू की गई है। यानी महज डेढ़ साल में एसटी के किराए में ये दूसरी बढ़ोतरी है।
कितनी हुई बढ़ोतरी?
एसटी महामंडळ ने जनवरी 2025 में यात्री किराए में 14.94% की बढ़ोतरी की थी। उसके बाद अब 17 जुलाई से फिर 13.56% की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है।
दोनों बढ़ोतरी मिलाकर डेढ़ साल में कुल किराया 28.50% तक महंगा हो गया है।
किस पर पड़ेगा असर?
गांव-देहात में किसान, छात्र, मजदूर और छोटे व्यापारी रोजमर्रा के सफर के लिए सबसे ज्यादा एसटी पर निर्भर हैं। लगातार हो रही बढ़ोतरी से राज्य के इन यात्रियों के बजट पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
महिलाओं और बुजुर्गों को दी जा रही यात्रा रियायतों का स्वागत तो हो रहा है, लेकिन कई यात्रियों का कहना है कि इन योजनाओं का आर्थिक बोझ दूसरे यात्रियों पर डाला जा रहा है।
बढ़ोतरी ही एकमात्र रास्ता?
एसटी महामंडळ का कहना है कि मेंटेनेंस और मरम्मत का खर्च बढ़ गया है, इसलिए किराया बढ़ाना पड़ा।
लेकिन यात्री सवाल उठा रहे हैं कि हर बार नुकसान की भरपाई किराए बढ़ाकर करना सही है क्या? प्रबंधन की खामियां दूर करने और आय के वैकल्पिक स्रोत बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
यात्री संगठनों की मांग है कि एसटी सेवा आर्थिक रूप से मजबूत भी रहे और आम लोगों के लिए किफायती भी, इसके लिए राज्य सरकार और महामंडळ को संतुलित नीति बनानी चाहिए।
आगे और महंगाई का डर
एसटी का किराया बढ़ने के बाद निजी बसों और अन्य यात्री वाहनों द्वारा भी किराया बढ़ाए जाने का डर है। अगर ऐसा हुआ तो नियमित यात्रियों को दोहरा आर्थिक झटका लग सकता है।
इसी वजह से इस बढ़ोतरी पर फिर से विचार करने की मांग उठ रही है।











