

*बेबसी की कैद में उत्तरकाशी का प्रवासी भारतीय।
*मनरेगा से चल रहा परिवार, पिता की वापसी के लिए दर-दर दस्तक दे रही बेटी।
उत्तरकाशी। घर की जिम्मेदारियों का बोझ लेकर सात समंदर पार गए उत्तरकाशी के प्रवासी भारतीय इंद्रमणि नौटियाल करीब नौ वर्ष से सऊदी में फंसे हुए है। उनकी घर वापसी को लेकर उनका परिवार बेहद चिंतित है। जिसे लेकर उनकी बेटी दीपिका ने दूसरी बार डीएम को ज्ञापन सौंपा।
परिजनों के अनुसार इंद्रमणि नौटियाल वर्ष 2018 में परिवार के भरण-पोषण के लिए सऊदी अरब गए थे, जहां उन्हें एक निजी कंपनी में ट्रक चालक की नौकरी मिली। परिवार का कहना है कि नौकरी के दौरान एक दुर्घटना हुई, जिसमें उनके खड़े ट्रक से एक कार टकरा गई और तीन लोगों की मृत्यु हो गई। इस मामले में उन्हें एक वर्ष का कारावास भुगतना पड़ा।
परिवार का दावा है कि सजा पूरी होने के बाद इंद्रमणि नौटियाल दोबारा कंपनी में चालक के रूप में कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित वेतन नहीं दिया जा रहा है। उनका यह भी आरोप है कि कंपनी ने उनका पासपोर्ट और वीजा अपने कब्जे में रखा हुआ है, जिसके कारण उनकी भारत वापसी संभव नहीं हो पा रही है। इंद्रमणि नौटियाल का कहना है कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन का बीमा नहीं था और इस मामले में सऊदी अरब की अदालत द्वारा करोड़ों रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। उनका कहना है कि वाहन का बीमा कराना कंपनी की जिम्मेदारी थी, जबकि दुर्घटना उनके खड़े ट्रक से हुई थी। ऐसे में उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया जाना उचित नहीं है।
इधर, उनकी पुत्री दीपिका ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास तथा विभिन्न जनप्रतिनिधियों को कई बार पत्र भेजकर अपने पिता की स्वदेश वापसी की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।दीपिका ने बुधवार को दूसरी बार जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य को ज्ञापन सौंपा।









