

कटनी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री संजय सत्येंद्र पाठक को न्यायालय अवमानना मामले में बड़ी राहत देते हुए उनके विरुद्ध लंबित आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेम्प्ट) प्रकरण का निराकरण कर दिया। न्यायालय ने विधायक द्वारा प्रस्तुत बिना शर्त माफी स्वीकार करते हुए मामले को समाप्त कर दिया, साथ ही भविष्य में इस प्रकार का आचरण दोहराने पर सख्त चेतावनी भी दी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया एवं न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि न्यायालय इस बात से संतुष्ट है कि संबंधित कृत्य ऐसा नहीं था जिससे न्याय की प्रक्रिया में वास्तविक और गंभीर हस्तक्षेप हुआ हो। न्यायालय ने उल्लेख किया कि 6 अप्रैल 2026 के आदेश के तहत पहले ही विधायक को बिना शर्त माफी प्रस्तुत करने की अनुमति दी जा चुकी थी, जिसे अब स्वीकार करते हुए प्रकरण समाप्त किया जा रहा है।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते विधायक को भविष्य में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए तथा इस प्रकार की स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। न्यायालय ने इसे रिकॉर्ड पर लेते हुए भविष्य के लिए सख्त हिदायत भी दी।
सुनवाई के दौरान विधायक संजय पाठक स्वयं न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए और कहा कि उनके मन में न्यायपालिका के प्रति सर्वोच्च सम्मान है तथा उनके किसी भी कृत्य का उद्देश्य न्यायालय की अवमानना करना या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना नहीं था। उन्होंने इसे अनजाने में हुई मानवीय भूल बताते हुए विनम्रतापूर्वक बिना शर्त माफी मांगी।
न्यायालय ने अपने आदेश में माना कि संबंधित कृत्य से न्याय के स्वाभाविक प्रवाह में कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं हुआ। अवमानना अधिनियम की धारा 12 एवं 13 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए न्यायालय ने विधायक की बिना शर्त माफी स्वीकार कर आपराधिक अवमानना प्रकरण का समापन कर दिया।
कोर्ट के निर्णय के बाद विधायक संजय पाठक के समर्थकों ने इसे न्यायपालिका के प्रति उनके सम्मान, पारदर्शी आचरण और निष्पक्ष रुख की पुष्टि बताया। समर्थकों का कहना है कि विधायक ने पूरे प्रकरण में न्यायालय की गरिमा का सम्मान किया और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग दिया।
कटनी ब्यूरो चीफ सुरेन्द्र कुमार शर्मा
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