सिद्धार्थनगर में सड़क निर्माण में बड़ा भ्रष्टाचार: बिना इंस्पेक्शन 39 लाख का भुगतान, धरातल पर मिली दलदल
दूसरी परियोजना में भी सामने आई धांधली: सिर्वत-बभनी संपर्क मार्ग पर आरसीसी सड़क के बजाय पिच सड़क बनाने और मूल कार्य अधूरा छोड़ने का आरोप; पूरी तकनीकी श्रृंखला (अवर अभियंता से मुख्य अभियंता तक) की भूमिका की जांच की मांग।
अजीत मिश्रा (खोजी)
सिद्धार्थनगर में सड़क निर्माण में बड़ा भ्रष्टाचार: बिना इंस्पेक्शन 39 लाख का भुगतान, धरातल पर मिली दलदल
सिद्धार्थनगर: लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड, सिद्धार्थनगर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले में सड़क निर्माण के दावों की जमीनी हकीकत का पर्दाफाश हुआ है। शोहरतगढ़ और सिर्वत क्षेत्र की सड़क परियोजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितता, बिना काम के लाखों रुपये का भुगतान और टेंडर प्रक्रिया में हुई भारी बचत को शासन से छिपाए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में अधिवक्ता प्रशस्त उपाध्याय ने अपर मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग को एक विस्तृत और गंभीर शिकायत भेजी है, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
मुख्य बिंदु:
- कागजों में विकास, मौके पर दलदल: शोहरतगढ़–मस्जिदिया संपर्क मार्ग पर कागजों में निर्माण कार्य प्रगति पर दिखाया गया, लेकिन दैनिक भास्कर की टीम द्वारा किए गए ग्राउंड जीरो निरीक्षण में पूरी सड़क दलदल में तब्दील मिली।
- बिना निर्माण के ₹39.77 लाख का भुगतान: आरोप है कि इस परियोजना में वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही ₹39.77 लाख का भारी-भरकम भुगतान कर दिया गया।
- टेंडर बचत का बड़ा खेल: प्रशासनिक स्वीकृति ₹113.63 लाख थी, जो टेंडर के बाद घटकर जीएसटी सहित ₹56.61 लाख रह गई। स्वाभाविक रूप से करीब ₹57 लाख की बचत होनी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने बी.एन.-15 में मात्र ₹3.03 लाख की बचत दर्शाते हुए शासन से ₹110.60 लाख की दूसरी किश्त की मांग कर दी।
- मद परिवर्तन के गंभीर आरोप: पहली किश्त की धनराशि का नियम विरुद्ध मद परिवर्तन कर अन्य कार्यों में उपयोग किए जाने की बात भी सामने आई है।
ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट: शोहरतगढ़–मस्जिदिया संपर्क मार्ग
जब शिकायत के बाद मीडिया टीम ने मौके का मुआयना किया, तो पता चला कि सड़क पर जगह-जगह पानी भरा हुआ है। निर्माण के नाम पर केवल कुछ स्थानों पर करीब तीन ट्रॉली जीएसबी (GSB) डालकर औपचारिकता पूरी कर ली गई थी। न तो वहां रोलिंग हुई थी और न ही कोई बेस तैयार किया गया था। आगे निर्माण कार्य का कोई नामो-निशान नहीं था।
ग्रामीणों का दर्द है कि बरसात के दिनों में यह सड़क उनके लिए सबसे बड़ा अभिशाप बन जाती है। स्कूली बच्चों, महिलाओं, किसानों और मरीजों को इसी कीचड़ और दलदल से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार दोपहिया वाहन फिसलने से लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। स्थानीय निवासी छेदीलाल गुप्ता ने बताया कि इस सड़क पर करीब 15 साल पहले बड़े स्तर पर काम हुआ था, जिसके बाद से सिर्फ झूठे आश्वासन ही मिले हैं। वहीं, लाल वचन का कहना है कि हर साल बरसात से पहले सड़क बनने की उम्मीद जगती है, लेकिन बारिश शुरू होते ही रास्ता फिर दलदल में तब्दील हो जाता है।
दूसरी परियोजना (सिर्वत-बभनी संपर्क मार्ग) में भी समान धांधली
शिकायत में एसएनबीएस सिर्वत–ससना–शाहा–जूड़ीकुईयां–जोगीबारी–खेतवल मिश्र होते हुए बभनी संपर्क मार्ग का भी जिक्र किया गया है।
- प्रशासनिक स्वीकृति: ₹92.24 लाख
- टेंडर एवं अनुबंधित लागत (जीएसटी सहित): लगभग ₹61.60 लाख (लगभग ₹30.94 लाख की स्वाभाविक बचत)
- विभाग का खेल: विभाग ने मात्र ₹1.45 लाख की बचत दिखाकर शासन से ₹91.09 लाख की दूसरी किश्त जारी करने की मांग कर दी। दोनों ही परियोजनाओं में एक ही तरह का वित्तीय पैटर्न अपनाया गया है।
सिर्वत गांव में ग्रामीणों ने बताया कि स्वीकृत योजना आरसीसी सड़क निर्माण की थी, लेकिन करीब चार महीने पहले वहां केवल ब्लैकटॉप (पिच) सड़क बना दी गई। इसके बाद भी प्रस्तावित आरसीसी सड़क का निर्माण शुरू नहीं हुआ। बरसात शुरू होते ही वह सड़क भी उखड़ने और खराब होने लगी है।
पूरी तकनीकी श्रृंखला की जांच और पुराने मामलों का जिक्र
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले में केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि पूरी तकनीकी श्रृंखला—अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक—की भूमिका की उच्चस्तरीय तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक जांच होनी चाहिए। यदि वास्तविक बचत सही दिखाई जाती, तो शासन से मांगी जाने वाली दूसरी किश्त स्वतः कम हो जाती।
शिकायत में प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, सिद्धार्थनगर के अधिशासी अभियंता कमल किशोर का भी नाम शामिल है। शिकायत में उनके पुराने कार्यकाल (देवरिया में तैनाती के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप और निलंबन तथा बाद में न्यायालय के आदेश से बहाली) का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है।
अधिकारियों का पक्ष: जब इस पूरे मामले पर अधिशासी अभियंता कमल किशोर से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने स्वास्थ्य ठीक न होने का हवाला देते हुए कहा कि मामले की पूरी जानकारी लेने के बाद वे दो से तीन दिन में अपना पक्ष रखेंगे। फिलहाल इस गंभीर वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही पर शासन स्तर से होने वाली कार्रवाई का इंतजार है।













