कोरिया /सोनहत वन विभाग द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों में एक बार फिर भ्रष्टाचार और नियमों की धज्जियां उड़ाने का गंभीर मामला सामने आया है। तालाब निर्माण कार्यों में स्थानीय गरीब मजदूरों को रोजगार देने के बजाय जेसीबी (JCB) मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉली का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है। इस मामले को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के राष्ट्रीय महासचिव, सांसद एवं विधायक प्रत्याशी श्याम सिंह मरकाम ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि “वन विभाग के तालाब निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
*मजदूरों का हक मारकर मशीनों का सहारा*
नियमों के मुताबिक, वन विभाग के अंतर्गत जल संरक्षण और तालाब निर्माण जैसे कार्यों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों और गरीब मजदूरों को रोजगार (मनरेगा व अन्य योजनाओं के तहत) मुहैया कराना होता है ताकि ग्रामीण स्तर पर पलायन रुके। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
मौके से सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि तालाब की खुदाई के लिए भारी-भरकम जेसीबी (JCB) मशीनें तैनात की गई हैं। दिन-रात मिट्टी की खुदाई कर उसे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए ठिकाने लगाया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से रातों-रात मशीनों को काम पर लगा दिया जाता है, जिससे स्थानीय मजदूरों का हक पूरी तरह से मारा जा रहा है।
*सरकारी राशि के बंदरबांट की मंशा?*
श्याम सिंह मरकाम ने इस पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि तालाब निर्माण के पीछे की असली मंशा विकास नहीं, बल्कि सरकारी राशि का खुलेआम दोहन और बंदरबांट करना है। मशीनों से काम कराकर कागजों में फर्जी मस्टर रोल तैयार करने और मजदूरों के नाम पर पैसे निकालने का खेल खेला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शासन की मंशा गरीब आदिवासियों और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने की है, लेकिन वन विभाग के कुछ अधिकारी अपनी जेबें भरने के लिए मशीनों से काम करवा रहे हैं। यह सीधे तौर पर शासकीय नियमों का उल्लंघन और गरीब जनता के साथ धोखा है।
कड़े आंदोलन और निष्पक्ष जांच की मांग
गोंगपा के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने उच्च अधिकारियों से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि:
तालाब निर्माण कार्य में लगी सभी मशीनों के उपयोग पर तुरंत रोक लगाई जाए।
अब तक हुए कार्यों की निष्पक्ष तकनीकी जांच निम्न बिन्दुओ पर –
*आठ से दस तथाकथित तालाबों की जांच*
*तालाब की गुणवत्ता का पैमाना क्या है?*
*तालाब हैं या किसानों का समतल बहरा खेत?*
*रातों रात मशीनो का उपयोग क्यूँ किया गया*
की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो।
अगर जल्द ही भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं कसी गई और स्थानीय मजदूरों को उनका हक नहीं मिला, तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी वन विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
















