नागपुर में इंजीनियरिंग प्रवेश का बड़ा रैकेट उजागर, अल्पसंख्यक कोटे के लिए TC में हेरफेर, 5 एजेंटों के खिलाफ केस दर्ज

नागपुर में इंजीनियरिंग कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटे से एडमिशन के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर छात्रों को अल्पसंख्यक वर्ग में प्रवेश दिलाने वाला बड़ा रैकेट सक्रिय होने का खुलासा हुआ है। इस मामले में नंदनवन और एमआईडीसी थाने में 5 एजेंटों और कॉलेज के कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
आरोपियों की पहचान शीतन धीर, वृषभ धोटे, पंकज धारवाल, शिवम निंबाळकर और एक काउंसलर के रूप में हुई है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, प्रियदर्शनी भगवती कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और रायसोनी इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रथम वर्ष बी.टेक में प्रवेश के लिए स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (TC) में फेरबदल कर छात्राओं को हिंदी भाषिक दिखाया गया।
पहले मामले में नंदनवन में रहने वाले एक माता-पिता अपनी बेटी के साथ प्रथम वर्ष बी.टेक (AI) में एडमिशन के लिए प्रियदर्शनी भगवती कॉलेज गए थे। वहां शीतन धीर ने मैनेजमेंट कोटे से प्रवेश दिलाने का झांसा दिया। इसके बाद मनीष नगर स्थित ऑफिस में छात्रा के दस्तावेज लिए गए और वहीं पर TC में मातृभाषा बदलकर उसे हिंदी भाषिक दिखा दिया गया और अल्पसंख्यक वर्ग से प्रवेश दिला दिया गया।
दूसरे मामले में एमआईडीसी स्थित हिंगना के रायसोनी इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश दिलाने के नाम पर 2 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई। आरोपी शिवम निंबाळकर ने कॉलेज के मैनेजमेंट विभाग में पहचान होने का दावा कर फर्जी TC और दस्तावेज तैयार किए और पिछले साल बी.टेक (AI) में एडमिशन दिला दिया।
व्हाट्सएप मैसेज से खुला राज
प्रवेश के बाद दोनों छात्राओं की परीक्षाएं चल रही थीं। लेकिन जनवरी 2026 में कॉलेज के व्हाट्सएप ग्रुप पर आए एक मैसेज से इन प्रवेश दस्तावेजों पर शक पैदा हुआ। इसके बाद कॉलेज के प्राचार्य और उच्च व तकनीकी शिक्षा निदेशालय (DTE) स्तर पर दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में विसंगतियां मिलीं और दस्तावेज फर्जी पाए गए।
इसके बाद उच्च व तंत्रशिक्षण संचालनालय की जांच के बाद प्रवेश नियामक प्राधिकरण (ARA) ने 31 जुलाई 2026 को दोनों छात्रों के प्रवेश रद्द कर दिए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और एजेंटों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा सामने आया।
इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त महक स्वामी के मार्गदर्शन में की जा रही है।
320 छात्रों के प्रवेश रद्द
इस घटना ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शहर में फर्जी दस्तावेजों से अल्पसंख्यक कोटे का लाभ दिलाने वाला बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? बताया जा रहा है कि शहर के विभिन्न कॉलेजों में इसी तरह से हुए 320 छात्रों के प्रवेश रद्द किए गए हैं। पुलिस अब जांच कर रही है कि क्या एजेंट माता-पिता को मैनेजमेंट कोटे का लालच देकर बड़ी रकम वसूलते हैं और फिर फर्जी कागजातों से एडमिशन कराते हैं।
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