एक पिता जो अपनी बेटी के न्याय के लिए अनशन बैठा काफी 9 दिन से यह मामला संजय गांधी हॉस्पिटल का

इनको कोई गरीब न कहना
ये हमारे रीवा के सबसे ' अमीर ' इंसान हैं…
ये हैं रामशिरोमणि मिश्रा जी। रीवा जिले के पचपहरा गांव के निवासी। ये बीते 9 दिन से रीवा के सिरमौर चौराहे पर आमरण अनशन पर हैं। बेटी के लिए न्याय मांग रहे हैं। इनका कहना है कि उनकी बेटी कल्पना और उसके नवजात को निर्दय सिस्टम ने असमय मौत की नींद सुला दिया। संजय गांधी अस्पताल की लापरवाह व्यवस्था ने उनकी खुशियों को हमेशा के लिए दफन कर दिया।
रामशिरोमणि अनशन स्थल पर पूरी दृढ़ता के साथ बैठे हैं। रामशिरोमणि एक बाप और औलाद के बीच प्रेम के जीवित प्रतीक हैं। उनको डिगाने के लिए लालच, भय और झूठे वादों के अस्त्र छोड़े गए, लेकिन सब बेअसर साबित हुए। उन्हें न्याय के अलावा और कुछ नहीं चाहिए।
नौ दिन से अन्न न ग्रहण करने के कारण रामशिरोमणि कमजोर हो चुके हैं, लेकिन केवल शरीर से। मन से नहीं। हिम्मत जब जवाब देने लगती है तो आंखें बंद कर वहीं लेट जाते हैं। इनकी बंद आंखों में भी अपनी लाडली और फूल से मासूम नाती की छवि स्पष्ट दिखती है। इसीलिए तो जान की परवाह किए बिना अडिग हैं।
बीते 9 दिन से अनशन स्थल पर सभाएं भी हो रही हैं। लोग अपने-अपने तरीके से रामशिरोमणि का हौसला बढ़ा रहे हैं। उन्हें हिम्मत दे रहे हैं। उनकी इस न्याय की लड़ाई में लोग खुद ब खुद जुड़ रहे हैं, बिना किसी स्वार्थ के। लेकिन मुझे इस बात पर दुख होता है, जब कोई यह कहता है कि एक गरीब न्याय की आस में बैठा है।
रामशिरोमणि के लिए गरीब शब्द मुझे आहत करता है, क्योंकि रीवा में आज मैं अगर किसी को सबसे अमीर मानता हूं तो वो हैं रामशिरोमणि। जो बाप दहाड़कर ये कहे कि मुझे कोई दस करोड़ भी दे तो मैं न्याय से समझौता नहीं करूंगा, मैं अपने जिगर के टुकड़े का सौदा कतई नहीं कर सकता, उससे अधिक अमीर कौन हो सकता है। वरना मैंने तो लोगों को सड़क जाम करके शवों की बोली लगाते हुए भी देखा है। रामशिरोमणि के मजबूत इरादे और ईमान के सामने दुनिया की हर दौलत तुच्छ है। ऐसे पिता को बार-बार प्रणाम
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
रिपोर्टर प्रवीण कुमार प्रजापति
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