नवरंगपुर: रायघर ब्लॉक के कोटपारा में वन और आदिवासी भूमि पर कब्जे का आरोप, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

*नवरंगपुर: रायघर ब्लॉक के कोटपारा में वन और आदिवासी भूमि पर कब्जे का आरोप, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल*
*नवरंगपुर, ओडिशा से ब्यूरो चीफ उपेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट | 11 सितंबर, 2026*
नवरंगपुर जिले के रायघर ब्लॉक अंतर्गत परुया पंचायत के कोटपारा क्षेत्र में वन भूमि और आदिवासी भूमि पर बाहरी लोगों द्वारा अतिक्रमण का गंभीर मामला सामने आया है। राज्य राजमार्ग के दोनों किनारे स्थित कीमती जमीन को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
*गरीब आदिवासियों की मजबूरी का उठाया जा रहा फायदा*
ग्रामीणों का आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर और असहाय आदिवासी परिवारों को थोड़ी सी रकम का लालच देकर उनकी पुश्तैनी जमीन हड़पी जा रही है। आरोप है कि बाहरी लोग गरीब परिवारों की आर्थिक लाचारी का फायदा उठाकर पहले जमीन का अवैध हस्तांतरण कराते हैं और फिर उसी जमीन पर व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए पक्के मकान और बड़ी इमारतें खड़ी कर लेते हैं।
*कानून के बावजूद कैसे हो रहा है कब्जा?*
इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा के लिए PESA और वन अधिकार कानून जैसे कड़े कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, तो फिर गैर-आदिवासियों द्वारा ऐसी जमीनों पर कब्जा कैसे हो रहा है? एक गरीब आदिवासी की जमीन छिन जाने के बाद उस पर पक्का निर्माण होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की शिकायतें सिर्फ कोटपारा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रायघर ब्लॉक के कई अन्य पंचायतों से भी आदिवासी जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त की खबरें आ रही हैं।
*निष्पक्ष जांच की मांग*
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि –
1. कोटपारा क्षेत्र में हो रहे भूमि हस्तांतरण के वास्तविक दस्तावेजों की जांच हो।
2. जमीन की सरकारी कीमत और जिस कीमत पर जमीन ली गई है, उसका सत्यापन हो।
3. बन रही इमारतों की वैधता और नक्शा पास है या नहीं, इसकी जांच की जाए।
ग्रामीणों ने रायघर तहसीलदार और नवरंगपुर जिला प्रशासन से भूमि अभिलेखों के सत्यापन की मांग की है। उनका कहना है कि आदिवासी परिवार के लिए जमीन सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी आजीविका, पहचान, अधिकार और आने वाली पीढ़ी का भविष्य है।
यदि गरीबों की बेबसी का फायदा उठाकर जमीन हड़पने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल जमीन विवाद नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकारों के हनन का बड़ा मामला होगा। ऐसे में प्रशासन को कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। फिलहाल क्षेत्र के लोगों की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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