पत्रकार की सत्ता के गुलाम नही होते,सच उजागर करना ही राष्ट के चौथे स्तंभ का कर्तव्य

पत्रकार1. राष्ट्रीय प्रेस दिवस (16 नवंबर)
कारण: 16 नवंबर 1966 को भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India – PCI) ने विधिवत रूप से कार्य करना शुरू किया था।
उद्देश्य: यह दिन स्वतंत्र और उत्तरदायी प्रेस के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पत्रकारिता बिना किसी दबाव, भय या पक्षपात के सच्चाई जनता तक पहुंचा सके।
2. हिंदी पत्रकारिता दिवस (30 मई)
कारण: 30 मई 1826 को कोलकाता से पंडित जुगल किशोर शुक्ल के संपादन में हिंदी भाषा का पहला समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' (उगता हुआ सूर्य) प्रकाशित हुआ था।
उद्देश्य: भारतीय जनमानस में हिंदी पत्रकारिता की नींव रखने और मातृभाषा में स्वतंत्र विचार संप्रेषण के ऐतिहासिक योगदान को याद करने के लिए यह दिन मनाया जाता है। 3.
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (3 मई)
वैश्विक संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 3 मई को अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया था। उद्देश्य: दुनिया भर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना, प्रेस पर होने वाले हमलों या सेंसरशिप के खिलाफ आवाज उठाना और कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले पत्रकारों को श्रद्धांजलि देना।
यह दिन मनाने के मुख्य उद्देश्य:
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मजबूत करना: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद पत्रकारिता को चौथा स्तंभ माना जाता है; यह दिन शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने की याद दिलाता है। प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा: पत्रकारों को निष्पक्ष, निडर और सुरक्षित माहौल में काम करने का अधिकार सुनिश्चित करना।
नैतिकता और जिम्मेदारी: पत्रकारों को फेक न्यूज, सनसनीखेज रिपोर्टिंग और पक्षपात से बचकर जिम्मेदार पत्रकारिता करने के लिए प्रेरित करना। किसी सत्ता के गुलाम नही होते और एक सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता करने के लिए किसी शासन प्रशासन के पट्टे की अवश्यकता नही होती ,और ना ही किसी अनुमति की पत्रकार राष्ट का चौथा स्तंभ है और वह संविधान के अनुच्छेद 19 के दायरे में अपनी स्वतंत्र आवाज़ उठाने एवम सच उजागर करने लिखने और दिखाने का अधिकार रखता है आपको बता दें यदि शासन प्रशासन स्वयं ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो वो कभी अपने विरूद्ध राष्ट के चौथे स्तंभ पत्रकारों को सच उजागर करने की अनुमति नहीं देगा , स्वतन्त्र पत्रकार सत्य के पथ के वो योद्धा होते है जो समय समय पर राष्ट की रक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा के के लिए अपनी लेखनी रुपी ब्रह्मास्त्र लेकर अडिग रहते हैं अक्षर ही परम ब्रह्म है अक्षर अमिट है अमर है इसे कभी मिटाया नहीं जा सकता इसलिए एक सच्चे पत्रकार को निडर और निष्पक्ष होकर राष्ट हित में अपना कर्तव्य पालन करना चाहिए जो सत्य धर्म की राह पर चलता रहा सत्य और धर्म स्वयं उसकी रक्षा करता है जय हिन्द
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