बड़ी खबर | सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

**₹6.41 करोड़ के हर्जाने की वसूली पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, यूपी सरकार को 3 सप्ताह में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश — अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को**

**सहारनपुर/प्रयागराज, 11 सितंबर 2026।** सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद से जुड़े विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। **Article 227 के तहत दाखिल Matter No. 12586 of 2026** में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट सहारनपुर द्वारा 16 जुलाई 2026 को लगाए गए **₹6,41,65,500 के हर्जाने की वसूली पर अगली तारीख तक रोक** लगा दी है। मामले की सुनवाई **हाईकोर्ट की कोर्ट नंबर-9 में माननीय न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल** ने की।
### ⚖️ हाईकोर्ट ने कहा—मामला विचार योग्य
अदालत के आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि **Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Act, 1971 की धारा 5** के तहत शुरू हुई कार्यवाही में याचिकाकर्ता ने लिखित बयान दाखिल कर मस्जिद के अस्तित्व और 100 वर्ष से अधिक समय से कब्जे में होने का दावा किया था।
इसके बाद **16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट, सहारनपुर ने बेदखली का आदेश पारित करते हुए ₹6,41,65,500 का हर्जाना लगाया।**
इस आदेश के खिलाफ **Misc. Civil Appeal No. 108 of 2026** जिला जज, सहारनपुर के समक्ष दाखिल की गई, लेकिन **2 सितंबर 2026 को अपील खारिज कर दी गई।**
### 🔥 याचिकाकर्ता की बड़ी दलील—“ध्वस्तीकरण में जल्दबाजी की गई”
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील भी रखी गई कि राज्य सरकार ने मस्जिद को गिराने में जल्दबाजी की और बेदखली आदेश पारित होने के कुछ ही दिनों के भीतर ध्वस्तीकरण कर दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से यह दावा किया गया कि जिस जमीन पर मस्जिद मौजूद थी, उसके मूल मालिक **याकूब खान और वाहिद खान** थे और उस जमीन का इस्तेमाल वक्फ के रूप में किया जा रहा था।
याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि निचली अदालतों द्वारा इन तथ्यों पर उचित विचार नहीं किया गया।
### 🏛️ सरकार की ओर से हाईकोर्ट में क्या कहा गया?
राज्य सरकार की ओर से **Additional Advocate General श्री मनीष गोयल** ने अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता के दावों का विरोध किया।
सरकार की ओर से कहा गया कि विवादित संपत्ति राजस्व रिकॉर्ड में **“कचहरी/कलेक्ट्रेट”** के रूप में दर्ज है।
सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई कि याचिकाकर्ता के लिखित बयान में एक ओर मूल मालिक याकूब खान और वाहिद खान होने का दावा किया गया है, लेकिन दूसरी ओर यह स्पष्ट नहीं किया गया कि जमीन को **कब वक्फ के रूप में समर्पित किया गया था।**
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि मामले में कोई **वक्फ डीड** रिकॉर्ड पर नहीं लाई गई है और जिन लोगों को मूल मालिक बताया जा रहा है, वे भी निचली अदालत में संपत्ति पर अपना दावा लेकर सामने नहीं आए।
### 📌 सरकार ने पोस्ट ऑफिस का भी दिया हवाला
राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में यह भी बताया गया कि विवादित जमीन पर वर्तमान में **पोस्ट ऑफिस संचालित हो रहा है।**
सरकार के अनुसार बेदखली की कार्यवाही इस आधार पर शुरू की गई थी कि कमरे किराए पर लिए जाने के बाद वहां मस्जिद का निर्माण किया गया और नमाज अदा की जा रही थी।
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# ⚖️ हाईकोर्ट ने फिलहाल क्या आदेश दिया?
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा—
**“Matter requires consideration of this Court.”**
यानी अदालत ने मामले को विचार योग्य माना है।
इसके बाद कोर्ट ने **Respondent No. 2 को नोटिस जारी करने** का निर्देश दिया।
### 📄 सरकार को 3 सप्ताह का समय
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को **तीन सप्ताह के भीतर Counter Affidavit दाखिल करने** का निर्देश दिया है।
इसके बाद याचिकाकर्ता को **Rejoinder Affidavit दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय** दिया गया है।
### 📅 अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026
मामले को अगली सुनवाई के लिए **12 अक्टूबर 2026** को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है।
लेकिन इस आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है हर्जाने की वसूली पर लगाई गई अंतरिम रोक।
## 🚨 ₹6.41 करोड़ की वसूली पर अगली तारीख तक रोक
हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि—
**“Till the next date of listing, the realization of damages imposed by the City Magistrate, Saharanpur vide order dated 16.7.2026 shall remain stayed.”**
अर्थात **सिटी मजिस्ट्रेट सहारनपुर के 16 जुलाई 2026 के आदेश के तहत लगाए गए ₹6,41,65,500 के हर्जाने की वसूली अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगी।**
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# 🔴 लेकिन हाईकोर्ट ने अभी अंतिम फैसला नहीं दिया
यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी बात समझना जरूरी है।
**हाईकोर्ट का यह आदेश अंतरिम प्रकृति का है।**
अदालत ने अभी यह अंतिम रूप से घोषित नहीं किया है कि मस्जिद का ध्वस्तीकरण अवैध था या याचिकाकर्ता का संपत्ति संबंधी दावा सही है।
इसी तरह हाईकोर्ट ने अभी वक्फ के दावे को भी अंतिम रूप से स्वीकार नहीं किया है।
अदालत ने मामले पर विचार की आवश्यकता मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है और **फिलहाल केवल ₹6.41 करोड़ के हर्जाने की वसूली पर अगली तारीख तक रोक** लगाई है।
अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार का काउंटर एफिडेविट बेहद महत्वपूर्ण होगा।
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# ❓ अब सबसे बड़े सवाल
### **क्या सरकार अपने काउंटर एफिडेविट में कलेक्ट्रेट/कचहरी के राजस्व रिकॉर्ड को प्रमुख आधार बनाएगी?**
### **मस्जिद की जमीन को वक्फ बताए जाने के दावे पर सरकार क्या जवाब देगी?**
### **क्या याचिकाकर्ता 100 साल से अधिक पुराने कब्जे और इस्तेमाल के अपने दावे के समर्थन में नए दस्तावेज पेश करेगा?**
### **क्या अगली सुनवाई में ध्वस्तीकरण के बाद की कार्रवाई को लेकर भी कोई अंतरिम आदेश सामने आएगा?**
### **और सबसे बड़ा सवाल—₹6.41 करोड़ के हर्जाने पर लगी रोक आगे जारी रहती है या नहीं?**
इन सभी सवालों के जवाब अब **12 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई** में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
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सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण में **प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब मामला हाईकोर्ट की न्यायिक निगरानी के अगले चरण में पहुंच गया है।**
एक तरफ याचिकाकर्ता की ओर से जमीन, लंबे समय से कब्जे और वक्फ से जुड़े दावे किए गए हैं…
दूसरी तरफ राज्य सरकार विवादित संपत्ति को **कचहरी/कलेक्ट्रेट के रूप में दर्ज सरकारी भूमि** बताते हुए वक्फ संबंधी दावे और दस्तावेजों पर सवाल उठा रही है।
और अब हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सरकार से जवाब मांगा है।
**फिलहाल सबसे बड़ी कानूनी खबर यही है—₹6,41,65,500 के हर्जाने की वसूली पर अगली सुनवाई तक रोक, राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश और अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को।**
**✍️ विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह**
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़, सहारनपुर**
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