किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल रहा है या नहीं, इसकी जांच करें: विधायक मुनगंटीवार

चंद्रपुर में दो दिवसीय किसान कार्यशाला आयोजित कर कृषि के लिए 'दिशा-निर्देशक प्रस्ताव' तैयार करने का सुझाव
चंद्रपुर:
"किसानों के पसीने से देश की भूख मिटती है और उनकी कड़ी मेहनत से देश की अर्थव्यवस्था खड़ी होती है। इसलिए, किसान केवल खेती करने वाला एक वर्ग नहीं है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ और राष्ट्र की प्रगति का असली आधार है।
अन्नदाता की समस्याओं को केवल योजनाओं और आंकड़ों के चश्मे से देखने से काम नहीं चलेगा; हमें उनके खेतों तक जाकर उनकी पीड़ा को समझना होगा।" यह बात राज्य के पूर्व वित्त मंत्री और विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसान मोर्चा को गांव-गांव और खेतों की मेड़ तक पहुंचकर अंतिम किसान की आवाज बनना चाहिए।
किसान की समस्या को अपनी समस्या मानकर उसे सरकार तक मजबूती से पहुंचाना और उसे न्याय दिलाना ही किसान मोर्चा की सच्ची जिम्मेदारी है। भारतीय जनता पार्टी चंद्रपुर (ग्रामीण) जिला की ओर से डॉ.
श्यामाप्रसाद मुखर्जी वाचनालय, चंद्रपुर में जिला स्तरीय किसान मोर्चा सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर विधायक देवराव भोंगले, किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण वेताल, संयोजक एवं एग्रीक्रॉस प्रमुख रवि निगुडे, किसान मोर्चा के महामंत्री संतोष देशमुख, रंगनाथ सोलंकी, विजय पिदुरकर, रवि चहारे, कृषि मूल्य आयोग के सदस्य बंडू गौरकर, देवानंद महाजन, प्रमोद कडस्कर, अनिल मोरे सहित जिले के किसान मोर्चा के तालुका अध्यक्ष और पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
इस सम्मेलन में विधायक मुनगंटीवार ने किसानों के मुद्दों पर किसान मोर्चा की आगामी भूमिका, संगठन निर्माण और सरकारी योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने को लेकर विस्तृत मार्गदर्शन किया। उन्होंने उपस्थित किसानों को 'बैल पोला' और आगामी गणेशोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए विघ्नहर्ता श्री गणेश से प्रार्थना की कि किसानों पर कोई संकट न आए।
विधायक मुनगंटीवार ने कहा कि 'जय जवान, जय किसान' हमारे लिए केवल एक नारा नहीं है। जिस पेशे पर देश के भरण-पोषण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, उस कृषि और किसान को केंद्र में रखना हमारी जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में 1 करोड़ 71 लाख 'सातबारा' (7/12) धारक हैं और करोड़ों लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। क्या योजनाएं पहुंचीं और क्या किसान संतुष्ट है?
संगठन की मजबूती पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि चंद्रपुर जिले के अंतिम गांव तक किसान मोर्चा पहुंचना चाहिए। सरकार की कई योजनाएं हैं, लेकिन हम उन्हें किसानों तक पहुंचाने में कितने सफल हुए हैं, इसका चिंतन होना चाहिए।
* समय पर लाभ: उन्होंने इस बात पर ध्यान आकर्षित किया कि योजनाओं का लाभ मिलने में हो रही देरी से किसानों में खुशी के बजाय निराशा पैदा होती है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, "अगर सब्सिडी पर ट्रैक्टर लिया और सब्सिडी कई सालों बाद मिली, तो योजना का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।" योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समय पर मिलना चाहिए।
किसानों के सवालों पर सक्रिय रहे किसान मोर्चा
किसानों के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए विधायक मुनगंटीवार ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा उठाया है और धान (चावल) के बोनस के लिए लगातार दबाव बनाया है। धान उत्पादक किसान गरीब होता है, इसलिए उन्हें न्याय दिलाने की भूमिका निभानी चाहिए।
चंद्रपुर से तैयार करें कृषि का दिशा-निर्देशक प्रस्ताव
विधायक मुनगंटीवार ने किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण वेताल से अपील की कि चंद्रपुर में किसान मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की जाए। * दो दिवसीय कार्यशाला: उन्होंने चंद्रपुर में दो दिनों की किसान कार्यशाला आयोजित करने का सुझाव दिया, जिसमें कृषि से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा हो।
* इस बैठक में एक ऐसा अध्ययनपूर्ण प्रस्ताव तैयार किया जाए जो किसानों, कृषि विभाग और कृषि मंत्रालय के लिए एक दिशा-निर्देशक (गाइडिंग डॉक्यूमेंट) साबित हो। चंद्रपुर की भूमि से निकली थी पहली 'संघर्ष किसान यात्रा'
भाजपा के किसान आंदोलनों के इतिहास को याद करते हुए उन्होंने लोकनेता गोपीनाथ मुंडे के नेतृत्व का जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि किसानों को पार्टी से जोड़ने के उद्देश्य से 1986 में गोपीनाथ मुंडे के नेतृत्व में भाजपा की पहली 'संघर्ष किसान यात्रा' चंद्रपुर के कालाराम मंदिर से ही शुरू हुई थी। चंद्रपुर की इस संघर्षशील परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज के किसान मोर्चा को नया काम खड़ा करना चाहिए।
इन चार बातों को केंद्र में रखकर करें काम
अंत में विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे "हम रहें या ना रहें, भारत ये रहना चाहिए" की भावना के साथ काम करें। उन्होंने किसानों के लिए काम करते समय इन चार बातों को अपने कार्य का केंद्र बनाने की सलाह दी:
* संवेदनशीलता
* गहन अध्ययन
* मजबूत संगठन
* प्रत्यक्ष कार्यवाही (Action)
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