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अलवर प्रतापगढ़ ,प्रसूताओ का 108 गाड़ी में ही प्रसव, सी एच सी कीनाकामयाबी पर भड़के ग्रामीण

15 Sep 2026, 03:19 PM • Vande Bharat Live TV News
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प्रतापगढ़ सीएचसी केवल ‘रेफरल सेंटर’ बनकर सिमटी, बीच रास्ते 108 एंबुलेंस में गूंजी दो नवजातों की किलकारी; बदहाल ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर भड़के ग्रामीण

(थानागाजी/प्रतापगढ़)
अलवर जिले के अरावली अंचल में बसे प्रतापगढ़-थानागाजी क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। प्रतापगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में उच्च केंद्र रेफर की गईं दो प्रसूताओं को अस्पताल की दहलीज तक पहुंचने का समय भी नहीं मिल सका और बीच रास्ते 108 एंबुलेंस में ही उनकी डिलीवरी करानी पड़ी। गनीमत रही कि एंबुलेंस कर्मियों की तत्परता और सूझबूझ से दोनों मामलों में जच्चा और बच्चा पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन इस दोहरे घटनाक्रम ने चिकित्सा महकमे के उन दावों की हवा निकाल दी है जिनमें ग्रामीण इलाकों में संस्थागत प्रसव को शत-प्रतिशत सुरक्षित बनाने का दावा किया जाता है।
पहला मामला ग्राम पंचायत बामनवास का है, जहां के निवासी राकेश कुमार अपनी गर्भवती पत्नी सीमा देवी को तेज प्रसव पीड़ा उठने पर उम्मीद भरी निगाहों के साथ प्रतापगढ़ सीएचसी लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने प्राथमिक जांच के बाद मामले को जटिल बताते हुए बिना कोई बड़ा जोखिम उठाए तुरंत अलवर जिला अस्पताल ले जाने की पर्ची काट दी। 108 एंबुलेंस सीमा को लेकर जिला मुख्यालय की ओर दौड़ी ही थी कि थानागाजी-घाटा के संकरे मोड़ के पास उनका दर्द असहनीय हो गया और प्रसव की स्थिति बन गई। हालात की नजाकत को भांपते हुए पायलट मुकेश गुर्जर ने गाड़ी को सुरक्षित किनारे रोका और ईएमटी हेमराज शर्मा ने उपलब्ध डिलीवरी किट की मदद से परिजनों के सहयोग से प्रसव करवाया, जहां सीमा ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।
इस घटना के चंद घंटों के भीतर ही दूसरा वाकया समीपवर्ती गांव बिचपुरी निवासी रामकरण मीणा की पत्नी रेखा बाई के साथ दोहराया गया। रेखा को भी प्रसव वेदना बढ़ने पर इसी अस्पताल में लाया गया था, लेकिन वहां स्त्री रोग विशेषज्ञ और आपात प्रबंधन न होने की बात कहकर उन्हें भी रेफर कर दिया गया। अलवर मार्ग पर किशोरी मोड़ के पास प्रसूता की हालत बिगड़ने पर एंबुलेंस कर्मियों को फिर से रास्ते में ही आपातकालीन प्रसव कराने के लिए विवश होना पड़ा, जहां रेखा ने एक नन्ही बच्ची को जन्म दिया। दोनों ही नवजातों और माताओं को प्राथमिक उपचार के बाद सुरक्षित नजदीकी केंद्र में दाखिल कराया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बामनवास और बिचपुरी सहित आसपास के दर्जनों गांवों के बाशिंदों में चिकित्सा प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष फैल गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि दर्जनों पंचायतों की बड़ी आबादी के इलाज का भार उठाने वाली प्रतापगढ़ सीएचसी महज एक ‘रेफरल केंद्र’ बनकर रह गई है, जहां सामान्य प्रसव कराने से भी हाथ खींच लिए जाते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से मांग की है कि इस सीएचसी में स्थायी रूप से महिला रोग विशेषज्ञ, सर्जन और चौबीसों घंटे आपातकालीन जांच उपकरण सुनिश्चित किए जाएं, ताकि किसी गर्भवती महिला या गंभीर मरीज को 60 से 70 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय की दौड़ न लगानी पड़े। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही ग्रामीण अस्पतालों की दशा नहीं सुधारी गई, तो क्षेत्रवासी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।

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