कलेक्टर-एसपी की नाक के नीचे अवैध शराब का अड्डा, किसके संरक्षण में फल-फूल रहा टिन शेड का कारोबार?

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती के VIP जोन में टिन शेड से अवैध शराब बिक्री का आरोप, प्रशासनिक सुरक्षा पर उठे सवाल
- सुरक्षा के दावों की खुली पोल: सर्किट हाउस-कलेक्ट्रेट के बीच अवैध शराब बिक्री
- शिव मंदिर के पास आबकारी नियमों की धज्जियां, टिन शेड बना अवैध बार
- टिन शेड का काला कारोबार: समय से पहले और आधी रात के बाद भी परोसी जा रही शराब
- बस्ती का VIP शराब कांड: उच्चस्तरीय जांच की मांग, कमिश्नर तक पहुंचा मामला
बस्ती, उत्तर प्रदेश | विशेष रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के सबसे संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी माने जाने वाले क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर शराब बिक्री का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि जिला मुख्यालय के वीआईपी जोन में एक टिन शेड के आड़ में निर्धारित समय से पहले और आधी रात तक अवैध रूप से शराब की बिक्री की जा रही है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह तथाकथित टिन शेड पुलिस-प्रशासन की नाक के नीचे संचालित होने का आरोप है।
1. घटनास्थल: क्यों है सबसे संवेदनशील?
स्थानीय लोगों के अनुसार जिस स्थान पर यह अवैध बिक्री की बात कही जा रही है, उसके 100 से 300 मीटर के दायरे में जनपद के सबसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान स्थित हैं:
• पुलिस अधीक्षक (SP) आवास एवं पुलिस चौकी
• जिलाधिकारी (DM) आवास
• जिला कलेक्ट्रेट परिसर
• सर्किट हाउस (वीआईपी विश्राम गृह)
• अमहट शिव मंदिर – एक प्रमुख धार्मिक स्थल
इतने कड़े सुरक्षा घेरे वाले इलाके में इस तरह की गतिविधि का आरोप, प्रशासन की गश्त और निगरानी प्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
2. नियम क्या कहते हैं? – तथ्य
आबकारी विभाग के नियमों के अनुसार उत्तर प्रदेश में शराब बिक्री के लिए सख्त समय-सीमा तय है।
• सामान्य दिनों में लाइसेंसी दुकानें सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक ही खुल सकती हैं। पहले यह समय रात 9 बजे तक था, जिसे बाद में बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया।
• विशेष पर्वों जैसे क्रिसमस और नववर्ष पर ही सरकार विशेष आदेश जारी कर समय रात 11 बजे तक बढ़ाती है। नई आबकारी नीति में इसे सुबह 9 से रात 11 बजे तक करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।
• सबसे महत्वपूर्ण बात – किसी भी हालत में टिन शेड, सार्वजनिक स्थान या बिना लाइसेंस वाले अस्थायी ढांचे से शराब बेचना पूर्णतः अवैध है। हर बिक्री का स्थान आबकारी विभाग द्वारा स्वीकृत लाइसेंस वाली दुकान ही होनी चाहिए।
• इसके अलावा धार्मिक स्थलों के निकट शराब बिक्री पर भी प्रतिबंध के नियम हैं। अमहट शिव मंदिर के समीप ऐसी गतिविधि से धार्मिक भावनाएं और कानून-व्यवस्था दोनों प्रभावित होने की आशंका है।
यदि आरोप सही हैं तो यह आबकारी अधिनियम की धारा 60/63 के तहत दंडनीय अपराध है, जिसमें अवैध बिक्री, निर्धारित समय से बाहर बिक्री और बिना लाइसेंस के बिक्री शामिल है।
3. आधी रात का खेल कैसे चल रहा है? – स्थानीय लोगों के आरोप
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि:
1. सुबह लाइसेंसी समय (10 बजे) से काफी पहले ही शटर के पीछे से बिक्री शुरू हो जाती है।
2. रात में दुकान बंद होने के बाद भी टिन शेड के पीछे से इशारों में ग्राहकों को शराब दी जाती है।
3. इस वजह से देर रात तक वीआईपी क्षेत्र में बाहरी लोगों और वाहनों का आना-जाना लगा रहता है, जिससे सुरक्षा को खतरा है।
नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय दुकानदार ने बताया, “यहां से दिन में एसपी, डीएम साहब का काफिला निकलता है, पुलिस की गाड़ी हर घंटे गश्त करती है। फिर भी यह टिन शेड सालों से है। यह बिना संरक्षण के संभव नहीं लगता।”
4. सबसे बड़ा सवाल: क्या मिलीभगत है?
इस प्रकरण में दो सवाल प्रशासन के सामने खड़े हैं:
पहला – अनभिज्ञता कैसे? जब एसपी आवास और पुलिस चौकी महज कुछ कदम पर है, तो बीट पुलिस को इसकी जानकारी न होना अविश्वसनीय माना जा रहा है।
दूसरा – संरक्षण किसका? जानकारों का मानना है कि इतने संवेदनशील जोन में बिना किसी अंदरूनी शह के कोई भी अवैध अड्डा चलाना मुश्किल है। सवाल आबकारी विभाग की नियमित जांच और पुलिस की रात्रि गश्त की प्रभावशीलता पर भी है।
नोट: ये स्थानीय लोगों के आरोप और चर्चाएं हैं। इसकी पुष्टि के लिए प्रशासनिक जांच जरूरी है।
5. क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
सामाजिक संगठनों ने इस मामले में निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:
1. जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से मौके का औचक निरीक्षण।
2. जिला आबकारी अधिकारी से टिन शेड के लाइसेंस की स्थिति पर लिखित स्पष्टीकरण।
3. पिछले 3 महीनों की सीसीटीवी फुटेज (कलेक्ट्रेट और सर्किट हाउस गेट की) की समीक्षा।
4. यदि अवैध पाया जाए तो तत्काल टिन शेड को सीज कर एफआईआर और विभागीय कार्रवाई।
5. पूरे प्रकरण की जांच कमिश्नर, बस्ती मंडल स्तर से कराई जाए।
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस खबर के प्रकाशन के बाद प्रशासन क्या एक्शन लेता है, इस पर पूरे जनपद की नजर रहेगी।
यदि वीआईपी जोन का यह हाल है, तो शहर के बाहरी इलाकों में आबकारी नियमों के अनुपालन की स्थिति क्या होगी, यह सोचने का विषय है।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट स्थानीय नागरिकों द्वारा दी गई सूचना, प्रत्यक्षदर्शियों के आरोपों और आबकारी विभाग के सार्वजनिक नियमों के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी व्यक्ति या अधिकारी पर मिलीभगत का आरोप सिद्ध नहीं है, जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। प्रशासन का पक्ष आने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।




