बाढ़ में डूबा बिहार, राहत के इंतजार में परिवार; जश्न से पहले पीड़ितों की चिंता जरूरी?
पटना/बिहार। बिहार के कई इलाकों में बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। घरों में पानी घुसने से अनेक परिवारों के सामने भोजन, सुरक्षित रहने की जगह और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा है। ऐसे समय में बाढ़ पीड़ित परिवारों की सबसे बड़ी जरूरत राहत, भोजन, स्वच्छ पानी, दवा और सुरक्षित आश्रय की है।
सरकारी स्तर पर राहत और आर्थिक सहायता पहुंचाने के प्रयासों की जानकारी सामने आई है। बिहार सरकार ने 8.27 लाख से अधिक प्रभावित परिवारों को ₹7,000 प्रति परिवार की सहायता सीधे बैंक खातों में भेजने की बात कही है। केंद्र सरकार की ओर से भी राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की गई है।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों और खर्च को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि जब हजारों-लाखों परिवार प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हों, तब क्या सार्वजनिक कार्यक्रमों पर होने वाले खर्च को लेकर सरकारों और आयोजकों को प्राथमिकताओं पर विचार नहीं करना चाहिए?
बाढ़ पीड़ितों की ओर से उठने वाला सबसे बड़ा सवाल यही है—उन्हें समय पर भोजन, पानी, दवा, कपड़े और रहने की सुरक्षित जगह कब मिलेगी?
यह सवाल किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि आपदा के समय पीड़ित इंसान की मदद को प्राथमिकता देने का है। सरकार और समाज के सामने चुनौती है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत तेजी से और पारदर्शी तरीके से पहुंचे, ताकि कोई परिवार भूखा या बेघर रहने को मजबूर न हो।