अप्रैल से नहीं मिली MDM की राशि, विशुनपुरा के 28 स्कूलों में मध्याह्न भोजन पर संकट

विशुनपुरा (गढ़वा)। विशुनपुरा प्रखंड के 28 विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना (MDM) की राशि समय पर नहीं मिलने से व्यवस्था गंभीर संकट में पहुंच गई है। प्रधानाध्यापकों के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अप्रैल माह से ही MDM मद की राशि का भुगतान नहीं हुआ है। कई महीनों से राशि लंबित रहने के कारण कई विद्यालयों के MDM खाते माइनस में चल रहे हैं।
प्रधानाध्यापकों का कहना है कि लगातार भुगतान लंबित रहने के कारण अब स्थानीय दुकानदार भी उधार में राशन-सामग्री देने से इनकार करने लगे हैं। गैस, सब्जी, राशन और अन्य जरूरी सामग्री की खरीद के लिए कई प्रधानाध्यापकों को अपनी जेब से भुगतान करना पड़ रहा है। इससे उन पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
तीन माह से मिल रहा सिर्फ आश्वासन
प्रधानाध्यापकों के अनुसार पिछले करीब तीन माह से विभाग की ओर से राशि जल्द भेजे जाने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ है। दूसरी ओर, मध्याह्न भोजन बंद होने पर विभागीय कार्रवाई की चिंता के कारण प्रधानाध्यापक निजी राशि खर्च कर बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था बनाए हुए हैं।
प्रधानाध्यापकों का कहना है कि लगातार निजी पैसे से MDM चलाना अब संभव नहीं है। दुकानदारों का बकाया बढ़ता जा रहा है और यदि जल्द राशि उपलब्ध नहीं कराई गई तो भोजन व्यवस्था जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
कई विद्यालयों में लाखों रुपये की राशि लंबित
प्रधानाध्यापकों के अनुसार कई विद्यालयों में MDM मद की बड़ी राशि बकाया है। इनमें पीएम श्री अमहर विद्यालय में करीब 2.50 लाख रुपये, +2 पिपरीकला में करीब 3.50 लाख रुपये, जीएमएस विशुनपुरा में करीब 2 लाख रुपये, अंबेडकर नगर में करीब 35 हजार रुपये, यूपीएस महुली खुर्द में करीब 45 हजार रुपये, एनपीएस टांडीपर में करीब 30 हजार रुपये, यूएमएस ओढ़ेया में करीब 70 हजार रुपये तथा यूएमएस सरांग में करीब 72 हजार रुपये लंबित बताए जा रहे हैं।
प्रधानाध्यापकों के अनुसार प्रखंड के अन्य विद्यालयों में भी MDM मद की राशि माइनस में चल रही है।
सितंबर तक इंतजार, फिर MDM बंद करने की चेतावनी
मामले को लेकर प्रखंड के प्रधानाध्यापकों ने आपस में निर्णय लिया है कि सितंबर माह तक राशि आने का इंतजार किया जाएगा। यदि सितंबर तक लंबित राशि का भुगतान नहीं हुआ तो विभाग को लिखित सूचना देकर मध्याह्न भोजन योजना बंद करने का निर्णय लिया जाएगा।
प्रधानाध्यापकों का कहना है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन लगातार निजी धन खर्च करना उनके लिए संभव नहीं है। राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण यदि MDM बंद करने की स्थिति उत्पन्न होती है तो इसकी जवाबदेही संबंधित विभाग की होगी।
दो साल से विद्यालय विकास मद भी लंबित
MDM के अलावा विद्यालय विकास मद की राशि भी लंबे समय से लंबित होने की शिकायत प्रधानाध्यापकों ने की है। उनके अनुसार करीब दो वर्षों से विद्यालय विकास के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिली है। इससे स्कूलों की छोटी-छोटी आवश्यकताओं को पूरा करने में परेशानी हो रही है।
विद्यालयों में चॉक, डस्टर, झाड़ू, साफ-सफाई और अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था के लिए भी राशि की आवश्यकता होती है। प्रधानाध्यापकों का कहना है कि राशि नहीं मिलने से विद्यालयों के रखरखाव और दैनिक संचालन पर भी असर पड़ रहा है।
राष्ट्रीय पर्वों के खर्च का भी भुगतान लंबित
प्रधानाध्यापकों के अनुसार 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों के आयोजन में होने वाले आवश्यक खर्च की राशि भी उपलब्ध नहीं हो रही है। ऐसे में विद्यालयों को छोटे-छोटे कार्यक्रमों का खर्च भी स्वयं वहन करना पड़ रहा है।
जिला शिक्षा अधीक्षक ने कहा—राशि आते ही किया जाएगा भुगतान
इस संबंध में जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने कहा कि विभाग को ऊपर से मध्याह्न भोजन मद की राशि अभी प्राप्त नहीं हुई है। जैसे ही राशि विभाग को प्राप्त होगी, विद्यालयों की लंबित MDM राशि के साथ-साथ विद्यालय विकास मद की राशि भी तत्काल रिलीज कर दी जाएगी।
वित्तीय व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
एक ओर विद्यालयों में बच्चों को नियमित मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर महीनों से राशि लंबित रहने के कारण प्रधानाध्यापकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अब दुकानदारों द्वारा उधार देने से इनकार किए जाने और निजी राशि से व्यवस्था चलाने की मजबूरी के बीच सितंबर तक भुगतान नहीं होने पर MDM बंद करने की चेतावनी ने विभागीय वित्तीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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