भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि पर अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है

प्रतिवर्ष हिंदी महिना भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि के दिन अनंत चतुर्दशी पर्व मनाया जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु जी के अनंत स्वरूप की पूजा वंदना की जाती है, इस दिन अनंत सूत्र भी बांधनें की परंपरा रही है, भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि अनंत चतुर्दशी के दिन ,दस दिनों तक चलने वाला श्री गणेशोत्सव भी श्रीगणेश जी की प्रतिमा विसर्जन के साथ संपन्न हो जाता है।पंचांग के अनुसार इस वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी का यह पावन पर्व शुक्रवार 25 सितंबर को मनाया जायेगा।
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु जी की पूजा आराधना की जाती है, इसके बाद अनंत सूत्र की पूजा करके उसको हाथ में बांधा जाता है। अनंत सूत्र में आमतौर पर चौदह गांठें लगाई जाती है,धार्मिक मान्यतानुसार अनंत सूत्र की इन चौदह गांठों को भगवान श्री विष्णु जी के अनंत स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है, भगवान श्री विष्णु जी के पूजा वंदना के बाद पुरूष इस अनंत सूत्र के अपने दाहिने हाथ और महिलाएं अपनें बाएं हाथ की कलाई पर बांधतीं हैं।.हाथ में अनंत सूत्र बांधते समय भगवान श्री हरि विष्णु जी का ध्यान चिंतन किया जाता है, और भक्तजन अपने परिवार की सुख शांति समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य की कामना ईश्वर से करतें हैं।
अनंत सूत्र को केवल एक धागा ही नहीं ,बल्कि इसे भगवान के प्रति श्रद्धा, आस्था के प्रतिक भी माना जाता है अनंत चतुर्दशी का यह पवित्र पावन दिन ईश्वर के भक्तजनों के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण दिन भी होता है, इस दिन श्रीगणेश चतुर्थी के दिन से शूरू होने वाला दस दिवसीय श्री गणेशोत्सव का श्री गणेश जी की प्रतिमा विसर्जन के साथ समापन भी होता है । इस दिन भक्तजन श्रद्धापूर्वक शोभायात्रा निकालकर गणपति बप्पा को विदाई देतें हैं, और पूरे विधि-विधान के साथ गणपति बप्पा की मूर्ति का विसर्जन पवित्र जलाशयों, नदी तालाबों में किया करतें हैं, और बप्पा जी अगले वर्ष फिर से आने की प्रार्थना करतें हैं।
हमारा भारत देश विविधता और अपार सांस्कृतिक समृद्धि वाला देश है। यहां पर.मनाए जानें वाले पर्व त्योहार, धार्मिक होने के साथ साथ ही आपसी सद्भाव, सामाजिक एकता वाले त्योहारों में व्यक्त किया जाता है।
भारत में उत्साह पूर्वक धूमधाम से मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों मे से एक है अनंत चतुर्दशी त्योहार, और यह.त्योहार दस दिनों तक चलने वाले श्री गणेशोत्सव के समापन का प्रतीक भी है। अनंत चतुर्दशी पर हर भक्तजन का दिल थोड़ा भारी हो जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान श्री गणेश जी के हमसे दूर जाने का एक उदासीन, भावनात्मक लगाव का एहसास भी होता है।.
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